दिल्ली के उपुमख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ऊपर नई शराब नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले में ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों को काम देने तथा अन्य अनियमितता होने का आरोप लगाया है। बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति को वापस भी ले लिया है। अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। सीबीआई ने सिसोदिया के कई ठिकानों पर छापा भी मारा है। अब इस मामले में प्रवत्र्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री भी होने वाली है। अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। भाजपा और आम आदमी पार्टी (आप) आमने-सामने आ गई हैं। खुद उपमुख्यमंत्री सिसोदिया तथा आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा आम आदमी पार्टी को परेशान कर रही है, क्योंकि अगला लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बनाम आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच होने जा रहा है। अरविंद केजरीवाल भी वर्ष 2014 से ही अपने को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। दिल्ली के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद अरविंद केजरीवाल का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। यही कारण है कि केजरीवाल आजकल दिल्ली के बजाय गुजरात और हिमाचल प्रदेश में ज्यादा नजर आते हैं। मालूम हो कि इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। केजरीवाल चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी की इन दोनों राज्यों में खाता खुले। इससे राष्ट्रीय स्तर पर केजरीवाल की स्वीकार्यता बढ़ेगी। दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्ष 2024 में होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार बनने के लिए प्रयासरत हैं। अपने इसी मिशन के तहत नीतीश ने भाजपा से नाता तोडक़र बिहार में राष्ट्रीय जनता दल सहित अन्य विपक्षी दलों से गठबंधन किया है। जदूयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने स्पष्ट कहा है कि अगर विपक्षी दल नीतीश कुमार को मौका देते हैं तो वे इस जिम्मेवारी को उठाने को तैयार हैं। हालांकि अभी तक विपक्षी दलों के बीच इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी प्रधानमंत्री पद के लिए अपने को विपक्ष का उम्मीदवार मानती हैं। इसके लिए वह पिछले कुछ महीनों से लगातार दिल्ली का दौरा कर विपक्षी नेताओं से मिलती रहती हैं। लेकिन हाल में ही ईडी द्वारा पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी एवं अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद ममता के स्वर नरम पड़े हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री की रेस में हैं। ऐसे में अभी तक इस संबंध में विपक्षी दलों की कोई बैठक भी नहीं हुई है। जब बैठक होगी उस दौरान संभावित नामों पर चर्चा होगी। किसी एक नेता के नाम पर सहमति बनना मुश्किल दिख रहा है। अगर केजरीवाल प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदार हैं तो नीतीश कुमार, राहुल गांधी और ममता बनर्जी का क्या होगा? कांग्रेस किसी भी कीमत पर आप को तरजीह नहीं दे सकती है। कांग्रेस को मालूम है कि अगर केजरीवाल को वरीयता दी गई तो वह कांग्रेस के लिए भस्मासुर साबित होंगे। भाजपा की तरफ से अभी से ही यह घोषणा हो चुकी है कि 2024 में नरेन्द्र मोदी ही प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार होंगे। अपनी इस रणनीति पर भाजपा ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मोदी का कद इतना बड़ा हो गया है कि उसके सामने विपक्ष का कोई नेता टक्कर देने की स्थिति में नहीं हैं। आगे समय बताएगा कि क्या तस्वीर उभर कर सामने आएगी?
मोदी बनाम केजरीवाल
