जब हम भगवान कृष्ण के बारे में बात करते हैं, तो हम सबसे पहले भगवद गीता को याद करते हैं, जिसके मूल्यों और विश्वासों के लिए इसकी व्यापक मान्यता है। जन्माष्टमी के अवसर पर हम आपको भगवद गीता के कुछ ऐसे उपदेश बता रहे हैं, जो आपको जीवन के मूल्य को समझने और हर दिन प्रेरित करने में मदद करेंगे। जो लोग केवल कर्म के फल की इच्छा से प्रेरित होते हैं वे दुखी होते हैं, क्योंकि वे जो करते हैं उसके परिणाम के बारे में लगातार चिंतित रहते हैं। भगवद गीता में कहा गया है कि मनुष्य को हमेशा अपना कर्म करना चाहिए। नि:स्वार्थ सेवा से आप सदैव फलदायी रहेंगे और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति पाएंगे। मनुष्य को नि:स्वार्थ रूप से सेवा करनी चाहिए। इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मनुष्य को हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। इससे आप कभी निराश नहीं होंगे और परेशानी के समय शांत दिमाग से हर समस्याओं का हल निकाल सकेंगे। गीता में बताया गया है कि काम, क्रोध और लोभ तीन प्रकार के नरक के द्वार हैं, जो मनुष्य इनको अपनाता है उसका नाश होता है। इसलिए मनुष्य को हमेशा काम, क्रोध और लोभ से दूर रहना चाहिए। जिस मनुष्य की दिनचर्या और खानपान संतुलित है और जो अनुशासन में रहता है। ऐसे लोग दुखों और रोगों से दूर रहते हैं। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए सिर्फ सात्विक चीजें खानी चाहिए। अगर जिस मनुष्य के अंदर जिज्ञासा है, उसे ही ज्ञान की प्राप्ति होती है। किसी जानकार व्यक्ति से पूछेंगे नहीं, तब तक वे कुछ बताएंगे नहीं. शास्त्रों में लिखी बातें, गुरु की बातें और अपने अनुभव में तालमेल बनाएंगे तभी ज्ञान हासिल कर पाएंगे। मनुष्य को हमेशा अपनी पसंद और स्वभाव को ध्यान में रखकर काम का चयन करना चाहिए। इसलिए आप हमेशा वहीं काम करें, जिसमें आपको खुशी मिलती है। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि जो काम हाथ में लिया है, उसे पूरा जरूर करें और अपने कोई भी काम अधूरे ना छोड़ें। चिंता करने से ही दुख का जन्म होता है। इसलिए मनुष्य को चिंता छोडक़र कर्म पर ध्यान देना चाहिए। जो इस चिंता को छोड़ देता है वह सभी जगह सुखी, शांत और अवगुणों से मुक्त हो जाता है। मनुष्य को हमेशा आत्ममंथन करना चाहिए, ताकि वह सही और गलत की पहचान कर सही रास्ते का चुनाव कर सके। मनुष्य को खुद से बेहतर कोई नहीं जानता और खुद से बेहतर कोई ज्ञान नहीं दे सकता। मनुष्य को अपनी संपूर्ण इंद्रियों को अपने वश में रखना चाहिए।