आगामी 11 अगस्त तक सावन महीना रहेगा। इसमें शिव पूजा के साथ दान और पेड़-पौधे लगाने का भी बहुत महत्व है। शिव पुराण में कहा गया है कि सावन महीने में दान से हर तरह का सुख, वैभव और पुण्य मिलता है। वहीं अन्य पुराणों में बताया गया है कि इस महीने में भगवान शिव की आराधना के साथ ही पूज्य पेड़-पौधे लगाने और उनका दान करने से शिवजी के साथ ही अन्य देवता और पितृ भी प्रसन्न होते हैं। धर्म ग्रंथों के जानकार पुरी के डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि सावन महीने में किसी भी चीज का दान करने से कई गुना पुण्य फल मिलता है। इस महीने में रूद्राक्ष, दूध, चांदी के नाग, फलों का रस और आंवला दान करने से जाने-अनजाने में किए पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही इस महीने में पौधारोपण करने से पितृ देवता प्रसन्न होते हैं। डॉ. मिश्र बताते हैं कि जिस इंसान को दान करने में आनंद मिलता है, उसे ईश्वर की कृपा मिलती है क्योंकि देना इंसान को श्रेष्ठ और सत्कर्मी बनाता है। सावन महीने में शिवजी का अभिषेक, शिवपुराण कथा पढऩे-सुनने और मंत्र जाप के अलावा दान का भी बहुत महत्व है। सावन महीने में चांदी के सिक्के दान देने या चांदी से बने नाग-नागिन की मूर्तियां शिवलिंग पर चढ़ाने से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। इससे ऐश्वर्य बढ़ता है। शिवालयों में वैदिक ब्राह्मण को रुद्राक्ष माला का दान करने से सुख बढ़ता है। श्रावण महीने में हर दिन दीपदान करने का बहुत महत्व है। दीप यानि ज्ञान प्रकाश। प्रकाश फैलाने की प्रेरणा दीप पूजन में है। इसका मतलब हमें विद्या-दान के क्षेत्र में भी संकल्पित होकर उतरना चाहिए, ताकि शिव भगवान की कृपा मिले। श्रावण महीने में बिल्वपत्र, शमीपत्र, शिवलिंगी, अशोक, मदार और आंवले का पौधारोपण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इनके साथ ही अनार, पीपल, बरगद, नीम और तुलसी लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं। पौधारोपण के साथ ही इन पेड़-पौधों का दान करने से भी उतना ही पुण्य मिलता है।