मुंबई: आने वाले दिनों में बैंक में ग्राहक की जमा पूंजी पर ज्यादा ब्याज मिल सकता है। जमा के मुकाबले कर्ज लेने वालों की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। इससे बैंकों के पास जमा को आकर्षक बनाकर निवेशकों को लुभाने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं है। रिजर्व बैंक के एक शोध पत्र में यह बात कही गई। शोध पत्र को आरबीआई के तीन विश्लेषकों ने लिखा है, जिसमें डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा शामिल हैं। वह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य हैं और केंद्रीय बैंक में मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख भी हैं। इस लेख को जुलाई माह के आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित किया गया है। यह शोध लेख विद्या कामटे और सौरभ घोष ने तैयार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सुधार गति पकड़ रही है। महंगाई भी कम हो रही है और मानसून बेहतर रहने का अनुमान है। इसकी वजह से कर्ज की मांग तेजी से बढ़ रही है। महंगाई में नरमी के संकेत से आरबीआई की चुनौतियां कम हो सकती हैं। आरबीआई सक्रिय रूप से दरों में बढ़ोतरी करके अपनी मौद्रिक नीति की मंशा और कार्रवाई की विश्वसनीयता को मजबूत कर सकता है। महंगाई को दरों में बढ़ोतरी के बजाए राजकोषीय उपायों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। शोध पत्र में कहा गया कि मजबूत बाह्य स्थितियों के कारण भारत फेडरल रिजर्व द्वारा की गई मौद्रिक सख्ती से निपटने में सफल रहा। फेडरल रिजर्व ने पिछले साल नवंबर में अपने संपत्ति खरीद कार्यक्रम को घटाने की घोषणा की थी। इसका प्रभाव भारतीय वित्तीय बाजारों में मध्यम रहा। ऐसा देश की मजबूत बाह्य स्थिति के कारण हुआ। इसमें कहा गया है कि मानसून में हुए सुधार से कृषि गतिविधियों के बेहतर रहने की उम्मीद है और ग्रामीण मांग जल्द ही तेजी पकड़ सकती है। इससे एक तरफ अनाज की अच्छी पैदावार से महंगाई घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं बंपर पैदावार से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आमदनी में इजाफा होगा। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।