पिछले 10 मई को हिमंत विश्वशर्मा सरकार के एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस दौरान सरकार द्वारा किए गए कामों का लेखा-जोखा जनता के सामने पेश किया जा रहा है। सरकारी विभाग सरकार की कामयाबी को जोर-शोर से  जनता के सामने रख रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने 9 जून को मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। नलबाड़ी के विधायक एवं मुख्यमंत्री के राजनीतिक जयंत मल्ल बरुवा एवं हाफलांग की विधायक नंदिता गार्लोसा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। जयंत मल्ल मुख्यमंत्री के बेहद खास माने जाते हैं। कार्बी आंग्लांग चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि पहाड़ी क्षेत्र से किसी एक प्रतिनिधि को मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने वादे के अनुसार नंदिता गार्लोसा को मंत्री बनाया है। मंत्रिमंडल में विस्तार के साथ-साथ मंत्रियों के विभागों में भी परिवर्तन किये गए हैं। चन्द्रमोहन पटवारी का कद पहले से काफी छोटा हुआ है। मुख्यमंत्री ने उनसे परिवहन एवं उद्योग मंत्रालय जैसा बड़ा मंत्रालय छीन कर बड़ा दिया है। अभी उनके पास पर्यावरण एवं वन, एक्ट ईस्ट पॉलिसी एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय हैं।  रंजित कुमार दास को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग देकर उनका हाथ और मजबूत किया गया है। परिमल शुक्लवैद्य को वन एवं पर्यावरण की जगह परिवहन विभाग का दायित्व दिया गया है। मत्स्य एवं आबकारी विभाग शुक्लवैद्य के पास पहले से ही है। अतुल बोरा एवं केशव महंत की स्थिति लगभग पहले जैसी ही है। अशोक सिंघल को गुवाहाटी विकास विभाग (जीडीडी) से मुक्त कर दिया गया है, जबकि आवास एवं नगर विकास तथा सिंचाई विभाग उनके पास बने रहेंगे। तमाम विवाद के बावजूद संजय किसन की कुर्सी बरकरार रखी गई है। पीयूष हजारिका को सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग देकर उनका हाथ मजबूत किया गया है। विमल बोरा से बिजली विभाग लेकर उनको उद्योग एवं वाणिज्य जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है। नंदिता गार्लोसा को बिजली मंत्रालय सहित चार मंत्रालय दिये गए हैं। इसी तरह जयंत मल्ल बरुवा पर मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है। उनको पर्यटन, पीएचई,  रोजगार, स्किल डेवलपमेंट जैसा मंत्रालय दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों मंत्रियों को महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी है। पिछले कुछ दिनों से मंत्रिमंडल के विस्तार एवं विभागों के बंटवारे को लेकर जोरदार चर्चा चल रही थी। अब देखना है कि मुख्यमंत्री की नई टीम विकास की गति को कितना तेज कर पाती है? मंत्रिमंडल विस्तार से कुछ विधायकों को जरूर निराशा मिली है जो मंत्री बनने का सपना देख रहे थे। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन पटवारी के कामकाज से नाराज लग रहे थे। मंत्रिमंडल के बारे में मुख्यमंत्री ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से टेलीफोन से विचार-विमर्श किया था। अब सबको नए मंत्रियों से बेहतर काम का इंतजार है।