गुवाहाटी : राज्य के पुलिस विभाग के अनुसार हजारों युवा विद्रोही समूह अल्फा (स्वतंत्र) में शामिल होने के लिए आगे बढ़ रहे हैं और यह चिंता का कारण है। हालांकि, युवाओं के अल्फा में आने का कोई वास्तविक कारण सामने नहीं आया है। उल्लेखनीय है कि विद्रोही संगठन अल्फा का गठन 1979 में एक स्वतंत्र असम के उद्देश्य से किया गया था। उत्तर पूर्व  के विद्रोही समूहों में से एक अल्फा को विदेशों से इसके संचालन के कारण नियंत्रित करने में भारत सरकार असमर्थ रही है। समय के परिवर्तन के साथ अल्फा ने अपने सदस्यता आधार को मजबूत  करने के लिए अपनी रणनीति भी बदल दी है। वर्तमान में अल्फा सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से सदस्यता भर्ती अभियान चला रहा है। केंद्र सरकार के शोषण और भेदभाव के खिलाफ अपना गुस्सा व्यक्त करने के लिए कई युवा अल्फा में शामिल हो गए हैं, जबकि अन्य कई बेरोजगार होने और अपने परिवारों का समर्थन करने में असमर्थ होने के कारण विद्रोही संगठन में शामिल हो गए हैं। हालाँकि, असम पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से अल्फा की संगठनात्मक गतिविधियों को रोकने में भरसक प्रयास कर रही है। असम पुलिस की विशेष शाखा के अनुसार अल्फा ने 2021 से अब तक सोशल मीडिया फेसबुक पर कुल 9 पेज खोले हैं। हालांकि,असम पुलिस के साइबर बूम ने अब इनमें से छह पेज बंद करने में कामयाबी हासिल कर ली है। फेसबुक पर अभी भी तीन अल्फा पेज सक्रिय हैं, जिनका उपयोग अल्फा द्वारा विभिन्न प्रचार अभियान चलाने के लिए किया गया है। लेकिन असम पुलिस ने इन पृष्ठों को भी बंद करने के लिए पहले ही फेसबुक अधिकारियों से संपर्क किया है। जिन फेसबुक पेजों को पुलिस बंद करने में सक्षम रही उनमें स्वाधीन कंठ, स्वाधीन असम और संयुक्त मुक्ति वाहिनी असम शामिल हैं। पुलिस सूत्र के अनुसार 1 जून 2018 से वर्तमान वर्ष के 6 मई तक अल्फा में शामिल होने की इच्छा रखनेवाले कुल 429 युवाओं को परामर्श दिया गया है और विद्रोही संगठन में शामिल होने से रोक लिया गया है। अल्फा के समर्थन में फेसबुक में पोस्टिंग करने वाले राज्य के 893 युवाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने अल्फा की ओर से कथित तौर पर प्रचार करने के आरोप में 23 मामले दर्ज कर 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। असम पुलिस ने पिछले चार वर्षों में सोशल मीडिया पर अल्फा के समर्थन में 450 पोस्ट भी हटा दिए हैं।