फ्रांस के राष्ट्रपति पद के चुनाव के निर्णायक चरण के लिए वोट डाले जा रहे हैं। प्रतिद्वंद्वियों के रूप में वर्तमान राष्ट्रपति और मध्यमार्गी माने जाने वाले इमानुएल माक्रों और कट्टर दक्षिणपंथी नेता मरीन ला पेन आमने-सामने हैं। उल्लेखनीय है कि 20 अप्रैल को मैक्रों और ली पेन के बीच लाइव डिबेट हुई थी, जिसमें मैक्रों आगे दिखाई दिए, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर मतदान कम रहता है तो जीत का पासा किसी भी ओर पलट सकता है। अगर 44 साल के  मैक्रों दोबारा राष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो यह वर्ष 2002 में जैक शिराक के बाद ऐसा करने वाले पहले राजनीतिक शख्सियत होंगे,जबकि 53 साल की ली पेन जीतती हैं तो वो फ्रांस की पहली महिला राष्ट्रपति बनेंगी। ली पेन अपने पिता के मुक्त बाजार, ज्यादा सरकारी खर्च की बजाए संरक्षणवादी रुख रखती हैं, वो मुक्त व्यापार की और यूरोपीय संघ की नीतियों की विरोधी हैं। वह रिटायरमेंट की उम्र 60 साल करने और 30 साल से कम उम्र के युवाओं पर इनकम टैक्स माफ और तेल-गैस पर वैट को 20 से 5.5 फीसदी लाने जैसे बड़े वादे की हैं। दूसरी ओर मैक्रों पेंशन की उम्र को 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने जैसे वादों से लुभा रहे हैं, लेकिन तेल-गैस की बढ़ती महंगाई से वो मुश्किलों में हैं। बेरोजगारों को सामाजिक सुरक्षा लाभ का वादा भी उन्होंने किया है। चुनाव से पहले के ओपिनियन पोल्स में मैक्रों को करीब 55 फीसदी मत मिलने की उम्मीद जताई गई थी,जबकि मरीन ला पेन को 45 फीसदी मत मिलने की आशा थी। इन ओपिनियन पोल्स में 3 फीसदी वोटों के ऊपर नीचे होने अनुमान भी होता है। ऐसा वाकई हुआ तो फिलहाल का करीबी मामला और भी कांटे का हो सकता है। फ्रांस में हर रोज 80 हजार से भी ज्यादा कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आ रहे हैं।  फिर भी मतदान में धांधली के डर से मेल-इन वोटिंग या पत्र के जरिए वोटिंग की अनुमति नहीं दी गई है यानी सभी को वोट डालने के लिए पोलिंग स्टेशन आना पड़ रहा है। भले ही वो कोरोना संक्रमित ही क्यों न हो। हालांकि कोरोना संक्रमित लोगों के लिए मास्क पहनने की अनिवार्यता रखी गई है। ऐसे लोग जो वोट डालने नहीं जा सकते,उनकी जगह पर किसी और को वोट डालने की अनुमति है। लेकिन ऐसे लोगों को चुनाव की तारीख से पहले ही एक फॉर्म भरकर पुलिस से वैरिफाई करवाना होता है। पहले चरण का चुनाव 10 अप्रैल को हुआ था जिसमें शामिल कुल 12 उम्मीदवारों में से कोई भी जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत वोट नहीं पा सका। सबसे ज्यादा मैक्रों को 28 प्रतिशत वोट मिले और मरीन ला पेन 23 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहीं। इस तरह चुनाव दूसरे चरण में दाखिल हुए जहां दो सबसे अधिक वोट पाने वाले दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। फ्रांस में अब भी चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होता है। फ्रांस के चुनावों के बारे में कहा जाता है कि पहले चरण में लोग अपने दिल की सुनकर मतदान करते हैं और दूसरे चरण में दिमाग से, लेकिन ऐसे कई लोग हैं, जो इमानुएल मैक्रों और मरीन ला पेन दोनों को ही राष्ट्रपति पद के उपयुक्तनहीं पा रहे। ऐसे मतदाताओं में बड़ी संख्या कट्टर वामपंथी नेता ज्यां लुक मिलांसों के समर्थकों की है। पहले चरण के चुनावों में तीसरे नंबर पर रहे मिलांसों को करीब 22 फीसदी मत मिले थे और मरीन ला पेन का वोट प्रतिशत उनसे सिर्फ 1 फीसदी ही ज्यादा था। ऐसे में माना जा रहा है कि ला पेन और मैक्रों में से जिसे भी मिलांसों के मतदाताओं का समर्थन मिलेगा, उसके लिए राष्ट्रपति बनने की राह आसान हो जाएगी।