आर्थिक तंगी एवं अस्थिरता के दौर से गुजर रही पाकिस्तान की नई सरकार के समक्ष कई चुनौती आने वाली है। इमरान खान के सत्ता से बाहर होने के बाद शाहबाज शरीफ के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ है। नए प्रधानमंत्री शरीफ ने शपथ ग्रहण के बाद भारत के साथ शांति एवं सहयोग के क्षेत्र में काम करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि वे भारत के साथ कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत करने को तैयार हैं। उनके जवाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत आतंकमुक्त पाकिस्तान के साथ सहयोग करने को तैयार है। आतंकमुक्त पाकिस्तान का मतलब यह है कि पाकिस्तान को पहले अपने यहां सक्रिय आतंकियों एवं उनके  ठिकाने को खत्म करना होगा। फिलहाल यह संभव दिख नहीं रहा है। पाकिस्तान की वादाखिलाफी जगजाहिर है। कभी भी पाकिस्तान अपना वादा पूरा नहीं करता है। समय-समय पर भारत की पीठ में छूरा घोंपने से बाज नहीं आता है। पाक के खराब रिकार्ड को देखते हुए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे अपने ग्रे लिस्ट में रखा है। गलत नीतियों के कारण पाकिस्तान आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। महंगाई चरम पर है। वहां की जनता महंगाई के विरोध में सडक़ों पर उतर चुकी है। बलूचिस्तान एवं सिंध जैसे प्रांत में अराजकता की स्थिति है। बलूचिस्तान की जनता अपने को पाकिस्तान से आजाद होना चाहती है। हाल ही में कनाडा में पाकिस्तानी प्रवासी नाजिरा कादिर के नेतृत्व में बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का गठन किया गया है। इस सरकार के लोग दुनिया के देशों में आजाद बलूचिस्तान के लिए समर्थन जुटाएंगे। तहरीक-ए-तालिबान ने पहले से ही पाकिस्तान में कोहराम मचा रखा है। इस संगठन के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के कई ठिकाने पर हमले किए थे, जिसमें सेना के कई जवानों को जान गंवानी पड़ी थी। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार अभी भी भारतीय सीमा के पास पाक स्थित लांच पैड पर 100 से ज्यादा आतंकी भारत में घुसने की फिराक में हैं। पाक के नए प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारत के साथ फिर से व्यापार शुरू हो, ताकि आर्थिक स्थिति सुधारा जा सके। यह तभी संभव है जब पाकिस्तान ईमानदारी के साथ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे। दोनों देशों के बेहतर संबंधों के बीच चीन भी एक बड़ी समस्या है। चीन नहीं चाहता कि दोनों देशों के संबंध बेहतर हों। चीन पाकिस्तान को हमेशा अपनी कठपुतली बनाकर रखना चाहता है, ताकि उसका भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सके। भारत को नए प्रधानमंत्री के ऑफर पर सावधान रहना होगा। मोदी सरकार काफी जांच-परख के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी। भारत को यह भी देखना होगा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख क्या है?