नई दिल्ली : श्रीलंका के हालात हर दिन के साथ बदतर होते जा रहे हैं। विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका है और चीन समेत अन्य देशों का कर्ज आसमान पर पहुंच गया है। ताजा हालातों की बात करें तो द्विपीय देश ने साफ कर दिया है कि वो विदेशी कर्ज को चुकाने की स्थिति में नहीं है। इस बीच इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका को किसी देश के हाथ में नहीं सौंपा गया है। श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट के बीच पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को कहा कि श्रीलंका में चीन की कुछ परियोजनाएं हैं, लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि देश को चीन या फिर किसी और मुल्क को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईंधन के लिए भारत की क्रेडिट लाइन मई के पहले सप्ताह तक समाप्त हो जाएगी, इससे एक और संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल, श्रीलंका सरकार ने भारत से क्रेडिट लाइन का विस्तार करने का अनुरोध किया है, ये जरूरी है क्योंकि सरकार ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है। वर्तमान हालातों की अगर बात करें तो देश के विदेशी मुद्रा संकट के बीच पेट्रोलियम की कीमतें आसमान छू गई हैं और पेट्रोल-पंप सूखे पड़े हैं। श्रीलंका की सरकार के पार पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं बची है जिससे ये संकट और भी गहरा गया है। कुछ दिनों पहले श्रीलंका से ऐसी तस्वीरे आईं कि लोग पेट्रोल खरीदने के लिए पेट्रोल पंप पर टूट पड़े हैं और लोगों को नियंत्रित करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। हजारों लोग घंटों तक कतार में इंतजार करके तेल खरीद रहे हैं। देश में डॉलर की कमी ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। देश में फरवरी में महंगाई 17.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो कि पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। यहां लोगों को एक ब्रेड का पैकेट भी 0.75 डॉलर (150) रुपए में खरीदना पड़ रहा है। यहीं नहीं मौजूदा समय में एक चाय के लिए लोगों के 100 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। देश में एक किलो मिर्च की कीमत 710 रुपए हो गई, एक ही महीने में मिर्च की कीमत में 287 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं  बैंगन की कीमत में 51 फीसदी बढ़ी, तो प्याज के दाम 40 फीसदी तक बढ़ गए। एक किलो आलू के लिए  200 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इस समस्या से उबरने के लिए सरकार को कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। हालात ये हैं कि श्रीलंकाई शेयर बाजार को आज से पांच दिन के लिए बंद कर दिया गया है। श्रीलंका के सिक्योरिटीज कमीशन के मुताबिक 18 अप्रैल से 22 अप्रैल तक कोलांबो स्टॉक एक्सचेंज को बंद रखने का आदेश जारी किया है। रिपोर्ट की मानें तो ये बड़ा फैसला इसलिए लिया गया है कि ताकि निवेशकों को देश की आर्थिक स्थिति को समझने और उसे स्वीकार करने का समय मिल सके। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ श्रीलंका (एसईसीएस) ने अपने बयान में कहा कि स्टॉक एक्सचेंज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और सभी शेयरहोल्डरों ने शेयर बाजार को अस्थायी रूप से कुछ दिनों के लिए बंद करने की मांग की थी। गौरतलब है कि श्रीलंका पर चीन, जापान, भारत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भारी कर्ज है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण वो अपने कर्जों की किस्त तक नहीं दे पा रहा है। श्रीलंका 51 अरब डॉलर (करीब 3 लाख 88 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा) के कर्ज के तले दबा हुआ है।