नई दिल्ली : यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध में कई देश रूस की मदद करने से इनकार कर चुके हैं। दुनियाभर की कई कंपनियों ने रूस में अपने ऑपरेशंस को बंद कर दिया है। इसके बाद भी रूस पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। इस बीच रूस में एयरलाइंस को लीज पर दिए गए प्लेन को वापस लेने के लिए वेस्टर्न कंपनियों की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। वहां के अधिकारियों का इरादा फॉरेन रजिस्टर्ड प्लेन को देश में रखने का है। राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने फॉरेन बिजनेसेस की संपत्ति का नेशनलाइजेशन करने पर चर्चा की है। एक परामर्श फर्म आईबीए के मुताबिक, गुरुवार, 10 मार्च तक देश के बाहर की कंपनियों द्वारा रूसी कैरियर को 523 प्लेन लीज पर दिए गए थे। इनमें 101 एसएल एयरलाइंस और 89 एयरोफ्लोट लीज पर हैं। दोनों एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइंग को बंद कर दिया है। इससे प्लेन को वापस लेने की संभावना खत्म हो गई है। एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी में फाइनेंस प्रोफेसर डॉ. विटाली गुजवा ने कहा कि अब सिर्फ आम सहमति है। प्लेन को फिर से प्राप्त नहीं कर पाएंगे। डॉ. गुजवा के साथ बीते दिनों सैन डिएगो में एक इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले कुछ लोगों ने इसका अनुमान पहले ही लगा लिया था। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ट्रेडिंग के एक इवेंट इस बात को जिक्र भी किया गया था। उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट आमतौर पर मान रहे हैं कि कंपनियों को भारी नुकसान की संभावना है। एविएशन कंसल्टिंग फर्म इश्का के अनुसार, प्लेन की कीमत 12 बिलियन डॉलर (करीब 92 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा है। आईबीए के अनुसार, कमर्शियल एयरक्राफ्ट को लीज पर देने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एयरकैप ने रूस को 142 प्लेन लीज पर दिए हैं। ये किसी भी दूसरी कंपनी की तुलना में सबसे ज्यादा है। हालांकि, एयरकैप ने मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी करने मना कर दिया है। जबकि बीते दिनों एक फाइनेंशियल डिस्क्लोजर के दौरान उसने इस बात का खुलासा किया था कि रूस के पास उसके बेड़े के प्लेन का 5प्रतिशत हिस्सा है। एसएमबीसी एविएशन कैपिटल ने रूस को 35 प्लेन को लीज पर दिया है। रूसी एयरलाइंस दुनिया में किराए पर प्लेन देने वाले बिजनेस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। एयरलाइंस को अपने बेड़े में एयरबस और बोइंग के प्लेन को आधुनिक बनाने के लिए इनकी बहुत जरूरत है। हालांकि, यूरोपीय संघ ने किराए पर प्लेन देने वाली कंपनियों को रूस में किए करारों को खत्म करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया है। हालांकि एयरस्पेस पर पाबंदी और स्विफ्ट पेमेंट ट्रांसफर में दिक्कतों के चलते इन प्लेन को वापस लाना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। सिंगापुर बेस्ड लीजिंग कंपनी बीओसी एविएशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डेविड वाल्टन ने कहा कि 28 मार्च की समय सीमा देश से सैकड़ों प्लेन को बाहर निकालने के लिए काफी कम समय है। फरवरी के आखिर तक रूसी एयरलाइंस बीओसी के मालिकाना हक वाले 18 प्लेन का इस्तेमाल कर रही थी। ये कंपनी के बेड़े का करीब 4.8प्रतिशत है। एविएशन कंसल्टिंग के फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव क्वेंटिन ब्रासी ने कहा कि यदि किसी कंपनी को उसके प्लेन मिल जाते हैं, लेकिन उनसे जुड़े रिकॉर्ड नहीं है तब वे उनके लिए बेकार हो जाते हैं।
वेस्टर्न एविएशन कंपनियों को झटका : लीज के 523 प्लेन को देश में रख सकता है रूस
