हर किसी को पता है कि प्लास्टिक से बना सामान लोगों की जिंदगी के लिए बेहद खतरनाक हैं और ये पर्यावरण को भी बहुत नुकसान पहुंचा रहा है, फिर भी लोग मानने का नाम नहीं ले रहे हैं। इनके लगातार इस्तेमाल से ये चीजों को लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं। साथ ही ये कचरे के रूप में ये पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या भी बन गया है, जिसे ख़त्म करने और इससे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए तमाम कोशिशें हो रही हैं। इसी कड़ी छत्तीसगढ़ में अबिकापुर नगर निगम ने पर्यावरण बचाने के लिए एक नई पहल करते हुए गार्बेज यानी कचरा कैफे खोलने योजना बनाई है। जिसके तहत गरीब और घुमंतू बेघर लोगों द्वारा प्लास्टिक का कचरा लाने के बदले उन्हें मुफ्त में नाश्ता और खाना खिलाया जाएगा। इस योजना के तहत प्लास्टिक को एकत्रित करके नगर निगम उसे रिसाइकिल कर सड़क बनाने में प्रयोग करेगा। छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर नगर निगम ने प्लास्टिक के कचरे से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए गार्बेज योजना तैयार की है, जिसके लिए निगम के बजट में साढ़े 5 लाख रुपए की धनराशि मंजूर की गई है। नगर निगम की इस योजना के अनुसार गरीब और घुमंतू बेघर लोगों द्वारा सड़क पर बिखरे हुए आधा किलो प्लास्टिक कैरी बैग लाने पर उन्हें बदले में भरपेट नाश्ता कराया जाएगा, जबकि एक किलो प्लास्टिक कैरी बैग लाने पर उसे मुफ्त भोजन कराया जाएगा। अंबिकापुर के मेयर डॉक्टर अजय तिर्की का कहना है कि प्लास्टिक कैरी बैग पर वैसे तो छत्तीसगढ़ में पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन गार्बेज कैफे के जरिये ये अभियान और भी मजबूत होगा। अजय तिर्की के मुताबिक इस योजना के तहत प्लास्टिक को एकत्रित करके उसके ग्रेनुअल का प्रयोग सड़क बनाने में किया जाएगा। उनका ये भी कहना है कि प्लास्टिक ग्रेनुअल से बनी हुई सड़क बहुत मजबूत होती हैं और लम्बे समय तक इसमें कोई खराबी नहीं आती, क्योंकि पानी इसके भीतर प्रवेश नहीं कर पाता। मेयर अजय तिर्की का दावा है कि 8 लाख प्लास्टिक के मिश्रण से प्रदेश में पहली सड़क यहीं बनाई गई थी। मेयर डॉक्टर अजय तिर्की ये भी दावा है कि गार्बेज कैफे के तहत इस अभियान को शुरू करने वाला अंबिकापुर देश का पहला शहर होगा और अभी तक किसी भी नगर निगम में ऐसी व्यवस्था नहीं है।
पर्यावरण बचाने के लिए प्रशासन ने शुरू की विशेष पहल