पृथ्वी पर वृक्ष का संबंध मानव से कुछ सालों या कुछ दशकों का नहीं बल्कि युगों का है। मगर आज बदलते समय के साथ और मनुष्य की बढ़ती आकांक्षाओं ने प्रकृृति को तहस नहस कर दिया है। जिसमें वृक्ष सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लोग पेड़ों के न होने वाले नुकसान को भली भांति जानते है फिर भी पौधों को काट कर घर, उद्योग व अनेक काम कर रहे हैं। इन सबके बीच एक गांव लोगों के मिसाल बना हुआ है। गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर से लगभग 100 किलोमीटर दूर मेहसाणा जिले के विसनगर तालूका के तरभ गांव में हरियाली ही हरियाली है। यहां के लोग अपने गांव को हरा भरा करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने में लगे हुए हैं। वे यह कार्यक्रम पिछले 5 सालों से चल रहे हैं। गांव के प्रवेश द्वार पर लगे वृक्षों से राहगीरों को आराम मिलता है। इस गांव का कोई भी रास्ता या गली नहीं है जहां पेड़ लगे न हो। तरभ गांव की जनसंख्या लगभग दस हजार के आसपास है। वहीं यहां का मुख्य जीविकोपार्जन का साधन खेती और पशुपालन है। गांव के कमलेश चौधरी जो पेशे से शिक्षक हैं, उनका कहना है कि आजकल तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है और गर्मी बढ़ रही है। वर्षा भी बहुत कम हो रही है। जिसके प्रभाव से आज पूरी दुनिया जूझ रही है। पांच साल पहले गांव के जागरुक लोगों ने यह सोचा की आखिर इस गर्मी से निजात कैसे मिले, तब हमने यह पाया की इसका एक ही इलाज है कि पेड़ पौधे अधिक से अधिक लगाए जाएं। इसे देखते हुये गांव के युवाओ ने मिलकर इस काम में अपना योगदान देना शुरू किया। शुरूआती समय में पेड़ लगाने में काफी परेशानी हुई। मगर हम हार नहीं माने और इस अभियान को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहे हैं।
पर्यावरण बचाने के लिए ग्रामीणों की अनोखी पहल