असम में व्यापारियों एवं बाहरी निवेशकों से समय-समय पर जबरन चंदा उगाही का काम चलते रहता है। अनेक संगठनों का काम जबरन चंदा उगाही से ही चलता है। उग्रवादी संगठन तो धमकी देकर फिरौती वसूलते हैं, किंतु चंदाजीवी संगठनों का धंधा भी कुछ इसी तरह चलता है। ये लोग भी चंदा नहीं देने वालों को धमकी देने से बाज नहीं आते हैं। इसको लेकर राज्य के कई जगहों पर हंगामा भी हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कुछ दिन पहले कहा था कि राज्य में व्यापार कर अपने परिवार का पेट पालने वाले लोगों से जबरन उगाही का काम नहीं होना चाहिए। खासकर उनका इशारा हिंदीभाषी व्यापारियों की तरफ था। उनका कहना था कि ये लोग अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ-साथ लोगों को रोजगार देते हैं। सरकार इस तरह की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया था कि इस तरह के काम को आपराधिक श्रेणी में रखा जाएगा। अब राज्य सरकार जबरन चंदा उगाही संस्कृति पर रोक लगाने के लिए विधानसभा के अगले सत्र में एक कड़ा विधेयक लाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने खुद इस बारे में संकेत दिया है। उनका कहना है कि इस विधेयक को लाने का मकसद उन संगठनों, समूहों एवं व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाना है, जो इस धंधे में शामिल हैं। ऐसा संकेत है कि पीड़ित व्यक्ति की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर आरोपी की संपत्ति जब्त कर मुआवजा देने का प्रावधान रखा जाएगा। राज्य सरकार असम में उद्योग-धंधे को बढ़ाने तथा बाहरी निवेशकों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रयासरत है। यह तभी संभव है जब राज्य में उपयुक्त वातावरण बने। बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना होगा।  बाहर से आए निवेशकों का आरोप है कि यहां काम शुरू करने के साथ ही जबरन उगाही काम भी होने लगता है। इस बारे में कानून बनने के बाद निश्चित रूप से सुधार होगा तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। दूसरी बात यह है कि लाल फीताशाही तथा कार्यालयीय प्रक्रिया को सुगम बनाना होगा।  मुख्यमंत्री ने परियोजना सद्भावना के तहत सरकारी विभागों में फाइलों को जल्द निपटारा करने की जो पहल शुरू की है उससे उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र में सकारात्मक संदेश जाएगा। मालूम हो कि मुख्यमंत्री ने इस पहल के तहत 10 मई 2021 तक के लंबित फाइलों को आगामी 15 अगस्त तक निपटाने का निर्देश दिया है। इसके लिए ई-कार्यालय बनाने की भी पहल शुरू की गई है। जिलों में भी ऑनलाइन फाइलों के निपटारा के लिए ई-ऑफिस प्रणाली मई से शुरू की जाएगी। सरकार इन सब कदमों से चल रही धीमी कार्य-संस्कृति में जान फूंकना चाहती है। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की है। इसका सार्थक परिणाम तभी आएगा जब इस पर ईमानदारी से अमल हो। उसके लिए कार्ययोजना बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इसके माध्यम से पूर्वोत्तर की आवश्यकताओं के मुताबिक बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं को फंड दिया जा सकेगा। इससे युवाओं और महिलाओं के लिए जीविका चलाना आसान हो जाएगा। जबरन चंदा संस्कृति पर रोक लगने से सभी विकास परियोजनाओं एवं बाहरी निवेश को गति मिलेगी, जिससे विकास की प्रक्रिया तेज होगी।