केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट पेश किया। इस बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। जहां सत्ता पक्ष इस बजट को विकासोन्मुखी बजट बता रहा है, वही विपक्षी दलों का मानना है कि इस बजट में नया कुछ भी नहीं है। वर्तमान बजट से सबसे ज्यादा निराशा मध्यम वर्ग खासकर नौकरीपेशा से जुड़े लोगों को है। कोरोना संक्रमण से प्रभावित मध्यम वर्ग के लोगों को ऐसी उम्मीद थी कि सरकार आयकर में राहत देगी। लेकिन इस बार सरकार ने आयकर की सीमा में कोई छूट न देकर नौकरीपेशा लोगों को झटका दिया है। केवल रिटर्न में संशोधन के लिए दो साल का वक्त देकर लॉलीपॉप जरूर थमा दिया गया है। वर्तमान बजट को उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पेश किया गया है। किसानों के हितों का विशेष ख्याल रखा गया है। अब न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि सीधे किसानों के एकाउंट में भुगतान होगी। मंडियों और अर्ढ़तियों की भूमिका खत्म कर दी जाएगी। वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट प्रस्तुत करते वक्त 12 बार किसानों का नाम लिया। उत्तर प्रदेश एवं पंजाब विधानसभा का चुनाव किसानों के मामले से जुड़ा हुआ है। बजट में मेक इन इंडिया के तहत 60 लाख नई नौकरियों के सृजित होने का प्रस्ताव भी रखा है। बजट में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए बुनियादी ढांचा के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हथियारों एवं अन्य उपकरणों की खरीद में लगने वाली पूंजी का 68 प्रतिशत घरेलू उद्योग को देने का प्रस्ताव किया गया है। क्रिप्टो करेंसी एवं डिजिटल करेंसी पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्र सरकार क्रिप्टो करेंसी जैसी वर्चुअल संपत्ति पर 30 प्रतिशत कर का प्रावधान रखा है। अब रिजर्व बैंक भी डिजिटल करेंसी जारी करेगी। नगदी प्रचलन को कम करने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयासरत है। डिजिटल विश्वविद्यालय भी खोलने का बजट में प्रावधान रखा गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में धन के आवंटन में 135 फीसदी का इजाफा किया गया है। इस क्षेत्र में 94 हजार करोड़ की जगह 2.38 लाख करोड़ धनराशि रखी गई है। निचले तबके के लिए सरकार गंभीर है। गरीबों के लिए एक साल में 80 लाख मकान बनाने का प्रावधान है।  सरकार के वर्तमान बजट से कृत्रिम गहने, छाता जैसी वस्तुएं महंगी होगी, जबकि कपड़ा, चमड़े का सामान, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, जूते-चप्पल एवं स्टील की वस्तुएं सस्ती होगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो बजट में न तो नए कर का प्रावधान रखा गया है और न ही करों में रियायत दी गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न परियोजनाओं के लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में पिछड़े इस क्षेत्र के लिए कोई विशेष सुविधा देने की घोषणा नहीं हुई है। मोदी सरकार को पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक विकास एवं पूंजी निवेश को बढ़¸ावा देने के लिए विशेष पहल की जरूरत है।