मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, अपराध तथा अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। ड्रग्स के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया गया, जिसके तहत भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए तथा सैकड़ों ड्रग्स तस्करों को हवालात तक पहुंचाया गया। इसी तरह माटी दलालों तथा कोर्ट-कचहरी में दलाली करने वाले लोगों को पकड़ा गया। इससे समस्या का पूरी तरह समाधान तो नहीं हुआ है, किंतु उसमें कमी जरूर आई है। अब सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए असम सरकार ई-ऑफिस प्रणाली शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने जनता भवन के अधिकारियों के साथ अपने संवाद में कहा है कि सरकारी अधिकारी वर्षों से पड़े फाइलों का जल्द से जल्द निपटारा करें। बहुत-सी फाइलें 30-35 साल से पड़ी हैं, जिसको कोई देखने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री अब जनता भवन के बाहर के अधिकारियों के साथ भी संवाद कर ऐसा ही दिशा-निर्देश देंगे। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों तथा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी ऐसी नई योजना को सार्वजनिक रूप से घोषणा नहीं करें जिनके लिए वित्तीय संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई हो। सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 24 से घटाकर छह कर दी है। इसमें एस्कॉट एवं पायलट वाहन शामिल नहीं हैं। इसी तरह गुवाहाटी से बाहर मुख्यमंत्री के काफिले में कुल 12 वाहन शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के काफिले के लिए दो मिनट से ज्यादा वाहनों को नहीं रोका जा सकेगा। एंबुलेंस के गुजरने के लिए मुख्यमंत्री का काफिला भी बाधक नहीं बनेगा। सरकारी कार्यक्रमों में मंत्रियों एवं अधिकारियों को उपहार लेने पर रोक लगा दी गई है। हिमंत सरकार अपने कार्य-कलाप से दूसरे सरकारों के मुकाबले अलग साबित करना चाहती है। पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा अलग तरह की रणनीति अपनाते हुए कोर्ट के बाहर समाधान खोजने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। असम और मेघालय के बीच विवादित 12 में से छह जगहों पर समाधान के लिए सहमति भी बन गई है। फिलहाल यह मामला गृह मंत्रालय के पाले में है। इसी तरह असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों के बीच बातचीत चल रही है। नगालैंड के मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे भी कोर्ट के बाहर सीमा समस्या का हल ढूंढ़ने के लिए असम के मुख्यमंत्री के साथ संपर्क में हैं। भविष्य में असम और अरुणाचल तथा असम और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों के बीच बातचीत होगी, जिसमें बहुत वर्षों से लंबित पड़े सीमा-समस्या का हल खोजने की कोशिश की जाएगी। असम और मिजोरम के बीच सीमा समस्या को लेकर हिंसक झड़प भी हुई थी, जिसमें असम के कई पुलिसकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। आतंकवाद की समस्या के समाधान के क्षेत्र में भी सरकार आगे बढ़ रही है। ट्राइबल आतंकी समूहों के साथ बातचीत सफल हो रही है। कुछ आतंकी संगठनों के साथ समझौता भी हो चुका है, जबकि कुछ के साथ वार्ता प्रगति पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हिमंत सरकार के सत्ता में आने के बाद अल्फा(आई) भी वार्ता की दिशा में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार न कर तथा एकतरफा संघर्ष विराम को घोषणा कर अल्फा(आई) ने यह दर्शाया है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगर अल्फा(आई) के साथ समझौता हो गया तो असम के विकास में तेजी आएगी।
हिमंत सरकार का फैसला
