यूक्रेन संकट को लेकर पश्चिमी देशों के संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) तथा रूस के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र को लेकर काफी वर्षों से विवाद चल रहा है। हाल ही में रूस द्वारा यूक्रेन की सीमा पर लगभग एक लाख सैनिकों की तैनाती करने तथा वहां युद्धाभ्यास करने से स्थिति और विस्फोटक हो गई है। यूक्रेन तथा नाटो के देशों का मानना है कि रूस युद्धाभ्यास के बहाने यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने रूसी समकक्ष पुतिन से यूक्रेन पर हमला न करने की सीधी चेतावनी दी है। बाइडेन का कहना है कि रूस यूक्रेन पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। मालूम हो कि उत्तरी अमरीका तथा पूर्वी यूरोप के 30 देशों का नाटो संगठन है। इस संगठन में ऐसा प्रावधान है कि अगर किसी भी सदस्य देश पर हमला होता है तो वह पूरे संगठन पर हमला माना जाएगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नाटो के देशों ने भी रूस की सीमा के पास सैनिकों एवं हथियारों का जमावड़ा लगाना शुरू कर दिया है। पूर्वी यूरोप एवं बाल्टिक सागर क्षेत्र में नाटो के देशों ने कई फाइटर जेट तथा युद्धपोतों को तैनात किया है। डेनमार्क ने लिथुआनिया में एफ-16 फाइटर विमान तैनात किया है, जबकि फ्रांस ने बुल्गारिया में अपनी सेना भेजी है। अमरीका भी पूर्वी यूरोप एवं बाल्टिक समुद्री क्षेत्र में अपनी सेना एवं युद्धपोतों को भेजने की तैयारी में है। अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि यूक्रेन का मुद्दा काफी विस्फोटक है। वहां की स्थिति को देखते हुए अमरीका ने रूस और यूक्रेन से अपने दूतावास के लोगों के परिजनों को तुरंत देश छोड़ने का निर्देश दिया है। अमरीका का मानना है कि वहां की आंतरिक अशांति से कुछ भी संभव हो सकता है। अगर इस क्षेत्र में युद्ध की शुरूआत होती है तो यहां से तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत हो सकती है। भारत के लिए यह विकट स्थिति है, क्योंकि चीन के खिलाफ अमरीका एवं नाटो सदस्य देश भारत के साथ खड़े हैं। दूसरी तरफ रूस के साथ भारत का पुराना रिश्ता है। भारत का लगभग 70 प्रतिशत हथियार और गोला-बारूद रूस से आयात होता है। युद्ध छिड़ने की स्थिति में भारत के लिए दुविधा की स्थिति पैदा हो जाएगी। दूसरी तरफ चीन का मानना है कि यूक्रेन को लेकर रूस और नाटो के बीच अगर टकराव हुआ तो उसका फायदा उसे मिल सकता है। भारत अकेले चीन को जवाब देने में सक्षम है। लेकिन ताइवान को लेकर स्थिति बिगड़ सकती है। अमरीकी राष्ट्रपति बाइडेन ने ताइवान को लेकर चीन को कड़ी चेतावनी दी है। बाइडेन ने कहा है कि यूक्रेन संकट को लेकर चीन को फायदा नहीं उठाना चाहिए। चीन की चालबाजी को ध्यान में रखते हुए अमरीका ने ताइवान की रक्षा के लिए अपने दो युद्धपोतों कार्लविल्सन एवं अब्राहम लिंकन को फिलीपींस के पास तैनात कर रखा है। अपने तीसरे युद्धपोत रोनाल्ड रीगन को जापान समुद्र तट के पास खड़ा किया हुआ है। अत्याधुनिक विमानों एवं मिसाइलों से लैश ये तीनों युद्धपोत चीन को उसकी औकात बताने के लिए काफी है। ताइवान ने भी चीन के द्वारा किए जा रहे लगातार घुसपैठ को देखते हुए अपने  वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है। ताइवान ने अपने सैनिकों को भी सुपर अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। कुल मिलाकर यूक्रेन एवं ताइवान संकट विश्व को तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल रहा है। सभी संबंद्ध पक्षों को धैर्य एवं विवेक काम करने की जरूरत है, क्योंकि युद्ध से किसी समस्या का हल नहीं हो सकता।