कहा जाता है कि विद्यालय शिक्षा प्रदान करने की ऐसी संस्थाएं होती हैं जहां किसी भी बच्चे का संपूर्ण व्यक्तित्व बदल जाता है और उसे नेक इंसान बनने की जिम्मेदारी भी विद्यालय पर ही होती है। लेकिन बदलते दौर में स्कूलों की भूमिका अब महंगी फीस लेकर बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान बांटने तक सीमित रह गई है। ऐसे हाल में कोलकाता में स्थित एक स्कूल की पहल की तारीफ करनी होगी। कोलकाता के लेनिन सरणी इलाके में स्थित यूनियन चपल स्कूल अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को पर्यावण को सुरक्षित और संरक्षित रखने की प्रैक्टिकल सीख प्रदान करता है। इसके लिए स्कूल परिसर में ही कई तरह के उपाय किए गए हैं, जैसे-

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग : स्कूल की प्रिंसिपल एंजेला घोष बताती हैं कि तीन साल पहले स्कूल में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया था ताकि वर्षा का जल बर्बाद न हो। इसे लगाने के बाद पूरे स्कूल से पानी की काफी बचत की गई। अब इसके जरिए जो पानी बचता है उसे कार धुलने से लेकर, शौचालय और स्कूल के बगीचे में पौधों को सींचने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं बच्चों को पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है और उनसे कहा जाता है कि वे इन आदतों का घर पर भी पूरी कड़ाई से पालन करें, जितना कि स्कूलों में करते हैं।

बिजली की बचत : आज के वक्त में महानगर में रहने वाला कोई इंसान बिना बिजली के अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। यही वजह है कि घर-घर पर इन्वर्टर लग गए हैं और बिजली जाने पर झट से वे चालू हो जाते हैं, लेकिन फिर भी बिजली की बचत करने के बारे में कोई नहीं सोचता। इस स्कूल में हर रोज 15 मिनट के लिए बिजली बंद कर दी जाती है। इसके साथ-साथ बच्चों को जागरूक करने के लिए कई सारे क्रियाकलाप आयोजित किए जाते हैं जिसमें ईंधन की बचत, बिजली का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करने और प्राकृृतिक संसाधनों का भी संरक्षण करने की प्रेरणा दी जाती है। बच्चे इसके लिए रैली निकालते हैं और पेट्रोल पंप तक लोगों को जागरूक करने के लिए जाते हैं।

प्लास्टिक पर पाबंदी :इन दिनों कई राज्य सरकारों द्वारा प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने की घोषणा हुई, लेकिन फिर भी लोगों का प्लास्टिक का इस्तेमाल जारी है। चपल स्कूल में प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। स्कूल में ही बच्चे प्लास्टिक के बैग बनाते हैं और उसे घर में भी इस्तेमाल करते हैं। स्कूल द्वारा पैरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों को पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करें। स्कूल में समय-समय पर बच्चों द्वारा पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं।