गुवाहाटी : असम विधानसभा में मंगलवार को असम पशु संरक्षण अधिनियम 2021 संशोधन विधेयक ध्वनि मत से सदन में पास कर दिया। इस संशोधन के जरिए जांच प्रक्रिया को और कड़ा बनाने तथा गाय की हत्या और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पुलिस की शक्तियां बढ़ाई गई हैं। संशोधन के तहत पुलिस आरोपी के घर में प्रवेश कर जांच कर सकती है और अवैध पशु कारोबार के जरिए पिछले छह साल में अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकती है। असम पशु संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2021 को पारित करने के दौरान सदन में हुई जोरदार बहस के बीच मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि वह यह संदेश देना चाहते हैं कि अवैध पशु कारोबार से निपटने को लेकर असम का रवैया बेहद सख्त है। विधानसभा में 20 दिसंबर को पेश किए गए इस विधेयक को लेकर विपक्षी सदस्यों ने कई संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, हालांकि, शर्मा के संबोधन के बाद सुझाव वापस ले लिए गए। केवल निर्दलीय विधायक अखिल गोगाई अपने उस रुख पर अड़े रहे कि पूरे अधिनियम की प्रकृति असंवैधानिक और सांप्रदायिक है। दूसरी तस्करी में उपयोग की गई गाड़ी को बेचने का अधिकार भी सरकार के पास होगा। उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार को असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की ओर से असम पशु संरक्षण (संशोधन) विधेयक , 2021’ पेश किया गया था। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि 5000 साल की सनातनी व्यवस्था के लिए कुछ करने का अवसर मुझे मिला है। इसके लिए हम हर हाल में काम करते जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ.शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि गाय की हत्या करने और गाय की तस्करी करने जैसे गैरकानूनी कार्य में लिप्त लोगों के साथ किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। गाय को हम पूजते हैं, यह हमारी सनातनी व्यवस्था की धरोहर है उसके लिए हमें जो भी अच्छा कदम उठाना होगा हम पीछे नहीं हटेंगे। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह किसी के धर्म-जाति को ध्यान में रखते हुए नहीं लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को अचनाक नहीं लाया गया हैबल्कि राज्य में गाय का वध करने, मांस के सेवन और परिवहन के नियमन के लिए अगस्त में विधानसभा से मूल कानून पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि पशुपालन और कृषि के लिए पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के वास्ते कुछ मौजूदा पाबंदियों को हटाने के मकसद से कानून में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इस संशोधन के जरिए कानून के दंड संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए नए प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। प्रस्तावित संशोधन विधेयक में राज्य के भीतर एक जिले से दूसरे जिले तक पशुओं के परिवहन की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही संशोधन विधेयक में कहा गया है कि राज्य के भीतर किसी जिले से अंतर्राज्यीय सीमा वाले जिले में पशुओं का परिवहन प्रतिबंधित होगा। सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के पास होने के बाद व्यापक पैमाने पर राज्य से गाय हत्या और तस्करी का मामला कम होगा। आज भी राज्य में 20 से 30 फीसद कारोबार चल रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नए विधेयक में वाहनों के मालिकों को शामिल किया गया। अगर किसी वाहन से गाय तस्करी की जाती है तो उसे जब्त कर बेचने का पूरा अधिकार सरकार के पास होगा। उन्होंने कहा कि तस्करी करने वाले अब गाय की तस्करी करने के बाद उस वाहन को जला रहे हैं, लेकिन ऐसे लोग फिर भी बच नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी किसी मंदिर के पांच किलीमीटर के दायरे के अंदर कोई भी व्यक्ति गाय के मांस की खरीद-बिक्री नहीं कर सकता, उन्हें गाय मांस के अलावा अन्य विकल्प ढ़ूंढने होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक से विपक्षी दलों ने भैंस को हटाने का सुझाव दिया था हमने माना। कामाख्या मंदिर हो या अन्य कहीं अगर भैंसी की बलि प्रथा है तो इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में गाय हत्या व तस्करी से संबंधित कानून और कठोर बनाया जाएगा। डा.शर्मा ने अपनी प्रतिवद्धता को दोहराते हुए कहा कि हमने आसम को आसमान की ऊचाई पर ले जाने का सपना देखा है और उस सपने को साकार करने के लिए हमारी सरकार दिनरात कड़ी मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि नेशल डेरी से हमने बात की है उनके साथ मिलकर राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। गाय तस्करी तथा मांस बेचने वालों पर की गई कार्रर्वा से सदन को अवगत कराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 56 मामले सामने आए हैं, जिसके तहत बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी,ऐसे लोगों को पकरने के दौरान गोली भी चलाई जिसमें एक की मौत और कई घायल हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस बिल के अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पास किए गए।
विस में पशु संरक्षण संशोधन विधेयक पास