नई दिल्ली : केंद्र सरकार जल्द ही सात राज्यों में 12-17 साल के बच्चों को वैक्सीनेशन की शुरुआत करेगी। केंद्र ने इन राज्य सरकारों से कहा है कि वो ऐसे जिलों को आइडेंटिफाई करें जहां वैक्सीनेशन कम हुआ है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही बच्चों के वैक्सीनेशन पर गाइडलाइन भी जारी कर सकती है। इसके साथ ही भारत दुनियाभर के उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जहां बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन दी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा है कि जायकोव-डी को पहले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में लगाया जाएगा। सरकार ने जायकोव-डी के एक करोड़ डोज का ऑर्डर नवंबर में ही दे दिया है। सरकार ने इन राज्यों से कहा है कि वो ऐसे जिलों को आइडेटिंफाई करें जहां वैक्सीनेशन कम हुआ है। उसके बाद ऐसे जिलों में 12-17 साल के लोगों को वैक्सीनेशन की शुरुआत होगी। सरकार ने जायकोव-डी को बच्चों के वैक्सीनेशन के लिए अप्रूव किया है। जायकोव डी को जायडस कैडिला ने बनाया है। डीसीजीआई ने अगस्त में कैडिला को अप्रूवल दिया था। वैक्सीन को 12 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (ईयूआई) की मंजूरी मिली है।
अक्टूबर में नेशनल ड्रग्स रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने कोवैक्सिन को भी बच्चों के लिए इमरजेंसी यूज की सिफारिश की थी। वैक्सीन को अब तक ष्ठष्टत्रढ्ढ से अप्रूवल मिलना बाकी है। इसे 2-18 साल के बच्चों को लगाया जा सकेगा। 2-18 साल के 920 कैंडिडेट पर कोवैक्सिन के दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल जारी हैं। कोवैक्सिन के 2-6, 6-12 और 12-18 साल तक के बच्चों पर अलग-अलग ट्रायल चल रहे हैं। बायोलॉजिकल-श्व की वैक्सीन कोर्बेवैक्स के भी दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल जारी हैं। कंपनी 5-18 साल उम्र के 920 कैंडिडेट पर ट्रायल कर रही है। अमरीकी वैक्सीन कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन भी दुनियाभर में बच्चों पर अपनी वैक्सीन का ट्रायल कर रही है। भारत में भी 12-17 साल के लोगों पर ये ट्रायल चल रहा है। जायडस कैडिला ने कहा है कि उसने 50 सेंटर पर 28 हजार से भी ज्यादा कैंडिडेट पर वैक्सीन का ट्रायल किया है। कंपनी का दावा है कि ये सबसे बड़ा वैक्सीन ट्रायल है। जिन 28 हजार कैंडिडेट को ट्रायल में शामिल किया गया था, उनमें से 1 हजार की उम्र 12 से 18 साल के बीच की थी। कंपनी ने कहा है कि ये ट्रायल इस एज ग्रुप में भी पूरी तरह सफल रहे हैं। ये अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि कोमोरबिडिटी वाले बच्चों को पहले वैक्सीनेट किया जा सकता है। साथ ही सरकार कोमोरबिडिटी में किन बीमारियों को जोड़ा जाए और इसके लिए किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत होगी, इस पर अभी विचार कर रही है। गाइडलाइन जारी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। भारत में जब वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई थी, तब अलग-अलग प्रायोरिटी ग्रुप के आधार पर लोगों को वैक्सीनेट किया गया था। माना जा रहा है कि बच्चों के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।