चौतरफा दबाव के बाद बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने 12 फरवरी को आम चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। लेकिन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस चुनाव नहीं चाहते हैं। वे किसी भी तरीके से चुनाव टालने की साजिश रच रहे हैं। नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता उस्मान हादी की हत्या के पीछे यूनुस सरकार की साजिश का आरोप लग रहा है। उस्मान के भाई ने मीडिया के सामने आकर यह सनसनीखेज आरोप लगाया। जिस कट्टरपंथियों को हथियार बनाकर मोहम्मद यूनुस सत्ता पर काबिज हुए हैं वे ही कट्टरपंथी आज उनके लिए राहू-केतु बने हुए हैं। बांग्लादेश में कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। कट्टरपंथी सरेआम अल्पसंख्यकों खासकर ङ्क्षहदू समाज के लोगों को निशाना बना रहे हैं। ङ्क्षहदुओं के घरों में आग लगाया जा रहा है तथा उनपर हमले हो रहे हैं। दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या इसका जीता-जागता उदाहरण है। वहां रहने वाले ङ्क्षहदू समाज के लोग दहशत के माहौल में जी रहे हैं। बांग्लादेश में रहने वाले ङ्क्षहदुओं ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन किया है। भारत, नेपाल तथा दुनिया के दूसरे भागों में भी बांग्लादेश के ङ्क्षहदुओं के समर्थन में प्रदर्शन हुए हैं। चीन और पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाली यूनुस सरकार अब दबाव महसूस कर रही है। भारत तथा रूस के बढ़ते दबाव के बाद अमरीका तथा पश्चिमी देश भी अब भारत के समर्थन में आते दिख रहे हैं। अमरीकी संसद के कई सांसदों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर ङ्क्षहदुओं पर हो रहे हमले को लेकर ङ्क्षचता व्यक्त की है तथा ट्रंप प्रशासन से आवश्यक कदम उठाने को कहा है। शुरुआत में अमरीका भी भारत विरोध के नाम पर बांग्लादेशी आंदोलन को हवा दे रहा था। भारत वहां की परिस्थिति पर नजर रखते हुए अपनी सामरिक तैयारी को मजबूत कर रहा था, ताकि जरूरत करने पर कार्रवाई की जा सके। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान के 17 वर्ष बाद बांग्लादेश लौटने के बाद स्थिति बदल गई है। अब मोहम्मद यूनुस को भी अपनी सत्ता गंवाने को लेकर भय लग रहा है। बीएनपी एक मजबूत राजनीतिक पार्टी है, जो बांग्लादेश में पिछले 40 वर्षों से सक्रिय है। पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में शुरू हुए छात्र आंदोलन के पीछे बीएनपी तथा जमियत-ए-इस्लामी तथा कुछ अन्य कट्टरपंथी संगठनों का हाथ था। लेकिन आम चुनाव की घोषणा के बाद ये कट्टरपंथी संगठन बीएनपी के खिलाफ खड़े होने की तैयारी में है। मोहम्मद यूनुस ने पहले ही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस कारण अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ सकती। अब अमरीका ने भी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध का विरोध किया है तथा कहा है कि ऐसे प्रतिबंध के बीच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव होना संभव नहीं है। पाकिस्तान बांग्लादेश को अपने देश की तरह ही कंगाल बनाने में लगा हुआ है, जबकि बांग्लादेश के कट्टरपंथी तत्व भारत विरोध के नाम पर पाकिस्तान की साजिश को समझ नहीं पा रहे हैं। मोहम्मद यूनुस सरकार पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रही है। खाद्यान्न, बिजली तथा पानी के लिए बांग्लादेश पूरी तरह भारत पर निर्भर है। अगर भारत ने इन तीनों चीजों को बंद कर दिया तो बांग्लादेश के लिए मुसीबत पैदा हो जाएगी। भारत को तोडऩे की धमकी देने वाला बांग्लादेश तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है। ऐसी स्थिति में बांग्लादेश को पाकिस्तान के उकसावे में न आकर भारत से बेहतर संबंध रखना चाहिए। भारत सरकार को भी वहां रहने वाले ङ्क्षहदू समुदाय के लोगों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाना चाहिए।