संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा कुछ अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया जिसके कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रश्नकाल की जगह एसआईआर पर बहस कराने की मांग की जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृृष्णन ने अस्वीकार कर दिया। उसके बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों के सदस्य चर्चा की मांग करते हुए अपने स्थानों पर खड़े हो गए। विपक्षी सदस्यों ने ‘एसआईआर वापस लो और लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ के नारे लगाये। सत्र के पहले दिम हंगामे की वजह से सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका। प्रधानमंत्री द्वारा विपक्ष पर की गई कड़ी टिप्पणी से भी विपक्षी सदस्य नाराज हो गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद ड्रामा करने की जगह नहीं है, यह काम करने की जगह है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद को चुनावी हार के बाद हताशा निकालने का मंच बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद रचनात्मक एवं परिणामोमुखी बहस का मंच होना चाहिए। मालूम हो कि बिहार में एसआईआर होने के बाद हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को भारी बहुमत मिली है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एसआईआर के माध्यम से विपक्ष की वोट चोरी कर रही है। विपक्ष ने इसके लिए चुनाव आयोग को भी कटघड़े में खड़ा किया है। प्रधानमंत्री ने इसी मुद्दे पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जहां-जहां आप लोग ऐसा आरोप लगा रहे हैं वहा-वहां आपको हार मिल रही है और आगे भी ऐसा होगा। मोदी ने विपक्ष पर करारा हमला करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों से विपक्ष जो खेल खेल रहा है वह जनता को स्वीकार नहीं है। कानून एवं व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में है। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल तथा असम में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। असम सहित देश के तेरह राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर का काम तेजी से चल रहा है। पश्चिम बंगाल की ममता सरकार एसआईआर का पुरजोर विरोध कर रही है, क्योंकि उनको भय है कि बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। अल्पसंख्यक मतदाताओं में तृणमूल कांग्रेस की अच्छी पैठ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग को चि_ी लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुकी है। असम में भी एसआईआर का काम शुरू हुआ है। पश्चिम बंगाल की तरह असम भी घुसपैठ से काफी प्रभावित है। घुसपैठ के खिलाफ आसू सहित कई संगठनों ने जोरदार आंदोलन भी चलाया था। उम्मीद है कि वर्तमान एसआईआर पहल से अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से कट जाएंगे। संसद लोकतंत्र का मंदिर है जहां देश के ज्वलंत मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होनी चाहिए। सभी राजनीतिक पाॢटयों को इस मामले में आत्मङ्क्षचतन करने की जरूरत है।
संसद का हंगामेदार सत्र