चुनाव आयोग ने असम में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए विशेष आदेश जारी किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम में एसआईआर का काम 22 नवंबर से शुरू होगा जो 20 दिसंबर तक चलेगा। इससे पहले 18 नवंबर से लेकर 21 नवंबर तक दस्तावेजों की प्रिंङ्क्षटग तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण का काम चलेगा। 18 नवंबर से बूथ लेबल के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जांच पड़ताल करेंगे। आयोग ने एक जनवरी 2026 को आधार वर्ष माना है। विशेष बात यह है कि असम में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में नागरिकता कानून 1950 के तहत नागरिकता के लिए काम चल रहा है। एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट के सीधे निगरानी में हो रहा है। यही कारण है कि चुनाव आयोग ने असम के लिए अलग से आदेश जारी किया है। इससे पहले अक्तूबर में चुनाव आयोग ने 12 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू करने का आदेश दिया था। आयोग ने छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, केरल, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्ष्यद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडूचेरी, राजस्थान, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश एवं पश्चित बंगाल में एसआईआर शुरू कर दिया गया है। इन राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी को प्रकाशित होगी, जबकि 10 फरवरी अंतिम मतदाता सूची निकलेगी। 27 दिसंबर से लेकर 22 जनवरी तक दावा एवं शिकायत के लिए तिथि निर्धारित की गई है। विधानसभा स्तर के मतदान पंजीयन अधिकारी शुद्ध मतदाता सूची बनाने के लिए अधिकृृत होंगे। किसी भी गड़बड़ी के लिए यही अधिकारी जवाबदेह होंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि एनआईआर के तरीके से ऐसा मतदाता सूची तैयार किया जाए, जिसमें किसी भी फर्जी मतदाता का नाम शामिल नहीं हो। अगले वर्ष असम, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, केरल एवं पुडूचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। असम में भी 2026 के शुरूआत में चुनाव निर्धारित है। ऐसी स्थिति में शुद्ध मतदाता सूची का होना जरूरी है, जिसमें किसी भी घुसपैठिए या फर्जी मतदाता का नाम शामिल नहीं हो। असम बांग्लादेशी घुसपैठियों से त्रस्त रहा है। असम की मतदाता सूची में घुसपैठियों का नाम शामिल होने का आरोप लगता रहा है। आसू सहित कई संगठनों ने इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन भी शुरू किया था। एनआरसी तैयार करने का मकसद विदेशियों का नाम मतदाता सूची से हटाना है। एसआईआर को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग तथा नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर है। बिहार में एसआईआर के तहत 60 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए थे। इसको लेकर विपक्षी दलों का आरोप था कि वैध मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिसको लेकर चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों को आरोप साबित करने की चुनौती भी दी थी। मतदाता सूची में किसी भी विदेशी या फर्जी मतदाता का नाम नहीं होना चाहिए। चुनाव आयोग को एसआईआर के दौरान कड़ी नजर रखने की जरूरी है ताकि निचले स्तर पर कोई हेराफेरी नहीं हो। कई जगहों पर बूथ लेबल के अधिकारियों द्वारा अपने कामों में लापरवाही बरतने की घटना सामने आती है। आयोग को इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए। असम बांग्लादेश से सटा राज्य है जो वर्षों से घुसपैठ से पीड़ित है। अत: यहां शुद्ध मतदाता सूची तैयार कराना बेहद जरूरी है।
असम में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण