मलेशिया में 26 अक्तूबर से 28 अक्तूबर तक तीन दिवसीय आसियान शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें आसियान के सदस्य देशों के साथ-साथ अमरीका, चीन, जापान, भारत सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा चीन तथा जापान के प्रधानमंत्री शामिल हुए। भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के शामिल नहीं होने को लेकर विशेष चर्चा रही। प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान शिखर सम्मेलन को वर्चुअल संबोधित किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं शदी भारत तथा आसियान का रहेगा। भारत की एक्ट-ईस्ट पॉलिसी में आसियान केंद्र में है। मोदी ने कहा कि आसियान के विजन 2045 तथा भारत का विकसित भारत 2047 का लक्ष्य एक ही है। मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति तथा चीनी प्रधानमंत्री के समक्ष कहा कि भारत ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में कानून का शासन चाहता है जिसमें सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान हो। मोदी ने मल्टीऑर्डर व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों में शांति एवं तरक्की के लिए हरसंभव सहायता को तैयार है। मोदी ने ग्रीन एनर्जी तथा साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर जोर दिया। यह सबको मालूम है कि अमरीका अपनी शर्तों पर दुनिया को नचाता है, जबकि चीन ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में अपने पड़ोसी देशों की सीमाओं का उल्लंघन करता रहता है। मोदी ने अपने संबोधन में चीन और अमरीका दोनों को एक साथ संदेश दे दिया है कि भारत अब अपनी शर्तों पर काम करेगा। आसियान में मलेशिया, इंडोनेशिया, ङ्क्षसगापुर,वियतनाम, फिलीपींस, कंबोडिया, थाईलैंड, लाओस, ब्रूनोई एवं म्यामां सदस्य हैं। मोदी ने ट्रंप को स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि ट्रेड केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आपसी साझेदारी का पैमाना भी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ सोई समझौता नहीं करेगा। ङ्क्षहद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन की बात उठाकर चीन को भी कड़ा संदेश दिया है कि वह इस मामले में आसियान देशों के साथ है। प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आने के बाद 2014 से 2019 तक लगातार आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत और आसियान के बीच व्यापार के अलावा सांस्कृृतिक संबंध भी है जो इन देशों के साथ दिलों को जोड़ता है। विदेश मंत्री जयशंकर ने घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर भारत की नीति को दुनिया के सामने रखा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आसियान सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मिलना चाहते थे, लेकिन मोदी अमरीका और भारत के बीच चल रही ट्रेड वार्ता पर अंतिम मुहर लगने से पहले मिलने से परहेज कर रहे हैं। भारत के बारे में ट्रंप का बार-बार बयान बदलना मोदी सरकार के लिए परेशानी का कारण है। आसियान देशों के साथ भारत के संबंध काफी गहरे हैं। खासकर फिलीपींस एवं वियतनाम के साथ भारत के प्रगाढ़ रणनीतिक संबंध हैं। भारत ने फिलीपींस को अपना सबसे घातक ब्रह्मोस मिसाइल दे रखा है। सम्मेलन में सीधे भाग न लेने के बावजूद मलेशिया के प्रधानमंत्री तथा फिलीपींस के राष्ट्रपति ने जिस तरह मोदी का गुणगान किया उससे लगता है कि आसियान में भारत का कितना महत्व है।