भूमध्य सागर में भारत और तुॢकए के बीच चल रहे तनाव के कारण शांत रहने वाला यह क्षेत्र सुॢखयों में आ गया है। तुॢकए द्वारा भारत के युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद को वापस लौटने की धमकी के बाद सारा खेल शुरू हुआ है। तुॢकए लगातार भारत को धमकी दे रहा था, ङ्क्षकतु भारत खामोशी बरते हुए था। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो भारत ने भी एक्शन लेना शुरू कर दिया। तुॢकए की लगातार धमकी के बाद भारत ने आईएनएस त्रिकंद को मजबूती देने के लिए अपने सबसे खतरनाक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत सहित तीन और युद्धपोतों आईएनएस चेन्नई, आईएनएस कोलकाता एवं आईएनएस विशाखापत्तनम को आधुनिक विमानों एवं हथियारों से लैस कर भूमध्य सागर में भेज दिया। तुॢकए को सबक सीखाने के लिए भारत ने सर्वप्रथम तुॢकए के गैस पाइप लाइन को ध्वस्त कर ऊर्जा की आपूॢत बाधित कर दी। इससे तुॢकए में अफरा-तफरी मच गई। तुॢकए की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति उसकी ड्रोन प्रणाली है। भारत ने अपने तकनीक से साइबर अटैक कर तुॢकए के कमान सेंटर को तहस-नहस कर दिया जिससे उसकी ड्रोन प्रणाली अस्त-व्यस्त हो गई। उसके बाद भारत ने अपने सेटेलाइट के माध्यम से तुॢकए के सिग्नल सिस्टम को भी तबाह कर दिया। सबसे पहले भारत ने तुॢकए द्वारा भूमध्य सागर में बनाए गए कृृत्रिम द्वीप को ब्रह्मोस मिसाइल दागकर बर्बाद कर दिया। जब भारत और तुॢकए के बीच टकराव बढ़ा तो तुॢकए ने नाटो से मदद मांगी क्योंकि तुॢकए नाटो का सदस्य है। नाटो के देशों ने स्थिति की वास्तविकता को समझते हुए तुॢकए को भारत के खिलाफ मदद देने से इनकार कर दिया ङ्क्षकतु नाटो ने अपनी फौज भूमध्य सागर में भेज दी है। अब भूमध्य सागर भारत-तुॢकए और नाटो के अखाड़े का केंद्र बन गया है। पहले नाटो भूमध्य सागर में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था, ङ्क्षकतु अमरीका के सीधे हस्तक्षेप के बाद अब नाटो भूमध्य सागर में दबदबा बनाने की कोशिश में है। भारत भी अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से भारत ने भूमध्य सागर को सभी देशों के सुगम आवागमन के लिए सुनिश्चित करने के पक्ष में आवाज उठाई है। दुनिया के अधिकांश देशों ने भारत के इस मुहिम का समर्थन किया है। रूस, चीन तथा इजराइल जैसे देश खुलकर भारत के समर्थन में आ गए हैं। रूस ने तो सीधे-सीधे भारत का समर्थन कर अपनी अत्याधुनिक नौसेना भूमध्य सागर में भेजने की पहल शुरू कर दी है। देखना है कि नाटो अब भूमध्य सागर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाता है। इस पूरे मामले में तुॢकए को जबर्दस्त झटका लगा है। तुॢकए चाहता था कि नाटो की सेना उसके पक्ष में भारत के खिलाफ उतर कर कार्रवाई करे ङ्क्षकतु नाटो ने तुॢकए को अलग-थलग कर खुद कमान संभालने की पहल की है। इससे तुॢकए को जबर्दस्त झटका लगा है। अब तुॢकए भारत के साथ बातचीत कर मामले को रफा-दफा करना चाहता है ङ्क्षकतु भारत अब पीछे हटने को बिलकुल तैयार नहीं है। इसका कारण यह है कि जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन ङ्क्षसदूर शुरू किया था, उस वक्त तुॢकए ने पाकिस्तान को अपने ड्रोन तथा दूसरे हथियारों की आपूॢत कर मदद की थी। अंतर्राष्ट्रीय मंच से तुॢकए लगातार कश्मीर के मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान की मदद करता रहा है। अब भारत ने भी तुॢकए को उसकी भाषा में जवाब देना शुरू किया है। भारत ने तुॢकए के पड़ोसी देशों ग्रीस, साइप्रस तथा अर्मेनिया को सैन्य एवं आॢथक सहायता देकर तुॢकए के लिए चुनौती प्रस्तुत की है। आईएनएस त्रिकंद ग्रीस के साथ संयुक्त अभ्यास के लिए पहुंचा था, जो तुॢकए को नगवार गुजरा था। भूमध्य सागर की घटना ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अब भारत अपने दुश्मनों को बख्शने को तैयार नहीं है।
भूमध्य सागर में भारत और तुॢकए के बीच चल रहे तनाव