शंघाई शिखर सम्मेलन (एससीओ) में भारत ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर परोक्ष रूप से पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के वाॢषक शिखर सम्मेलन में कहा कि पहलगाम में हुआ भयानक आतंकी हमला न केवल भारत की अंतरात्मा पर आघात है बल्कि मानवता में विश्वास रखने वाले प्रत्येक राष्ट्र के लिए खुली चुनौती भी है। मोदी ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड त्यागने की जोरदार वकालत की। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहवाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनङ्क्षपग और वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में पाकिस्तान और आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को स्पष्ट संदेश दिया। भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि एससीओ के साझा घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी घटना का जिक्र किया गया। संयुक्त घोषणा पत्र में पहलगाम घटना की कड़ी ङ्क्षनदा की गई तथा मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई। पाक के प्रधानमंत्री के सामने पहलगाम घटना के आयोजकों तथा प्रायोजकों को सजा दिलाने का जिक्र हुआ है। इसके साथ ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का भी जिक्र किया गया है। मालूम हो कि चीन में पहले हुए रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान पहलगाम की घटना का जिक्र नहीं किया गया था, जिसके विरोध में रक्षा मंत्री राजनाथ ङ्क्षसह ने संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। ऐसा लगता है कि ट्रंप के टैरिफ बम ने पाकिस्तान के आका चीन को यूटर्न लेने पर मजबूर कर दिया है। चीन जैसे कुटिल पड़ोसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता, ङ्क्षकतु अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में कोई भी किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। जिस तरह ट्रंप ने दुनिया के देशों को टैरिफ बम से आतंकित कर रखा है उससे पीड़ित देश एक मंच पर आ रहे हैं। चीन भारत से संबंध मजबूत करने के लिए पाकिस्तान को दरकिनार कर रहा है, लेकिन भीतर ही भीतर दोनों के संबंध बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वाॢषक शिखर सम्मेलन से हटकर रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनङ्क्षपग से द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुतिन ने मोदी को अपनी कार में लिफ्ट दी तथा दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक से पहले उनकी कार में ही 50 मिनट तक बातचीत करते रहे। उनके बीच क्या गोपनीय वार्ता हुई इसका तत्काल खुलासा नहीं हुआ है। मोदी ने एससीओ के प्लेटफॉर्म से रूस और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाकर अमरीका को कड़ा संदेश दिया है। साथ ही चीन को भी भारत के नजदीक आने पर मजबूर किया है। भारत ने अमरीका को सख्त कूटनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है कि भारत के पास उसके खिलाफ दूसरा विकल्प भी है। यही कारण है कि अमरीका में भी भारत के प्रति ट्रंप की नीतियों का विरोध शूरू हो गया है। देखना है कि अब अमरीका का अगला रुख क्या रहेगा?
भारत की कूटनीतिक जीत