मोरेह : 13 नवंबर को असम राइफल्स के 5 जवानों की शहादत के बाद सेना ने म्यामां बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी है। खुफिया जानकारी भी जुटाई जा रही है। बताया जा रहा है कि उग्रवादी हमला करने के बाद म्यामां भाग गए हैं। म्यामां से 398 किमी का बॉर्डर साझा करने वाले मणिपुर का मोरेह टाउन वह जगह है, जहां से म्यामां की दूरी 50 मीटर से भी कम है। यहां एक तरफ म्यामां में रहने वाले लोग नजर आते हैं तो दूसरी तरफ भारतीय। मोरेह में कुकी, मैती, बिहारी, तमिल, मारवाड़ी और नेपाली रहते हैं। यहां इंडिया-म्यामां फ्रेंडशिप गेट बना हुआ है, जिसके जरिए बिना किसी पासपोर्ट या वीजा के म्यामां के लोग इस टाउन में आ सकते हैं और यहां से लोग म्यामां जा सकते हैं। हालांकि कोरोना के चलते यह गेट करीब दो साल से बंद है। इस गेट के अलावा टाउन में ही एक ब्रिज भी है, जहां से दोनों देशों के लोग आना-जाना करते हैं। अभी ब्रिज भी बंद है। मोरेह के लोग कहते हैं- ब्रिज और गेट खुलने वाले थे, लेकिन इसी बीच हमारे जवानों पर हमला हो गया और सेना ने फिर सख्ती बढ़ा दी। हालांकि गेट बंद होने के बाद भी दोनों तरफ के लोगों का आना-जाना हो रहा है। म्यामां से जो लोग मोरेह आते हैं, उन्हें शाम 4 बजे तक हर हाल में वापस लौटना पड़ता है। मोरेह टाउन के लोग सस्ता सामान खरीदने म्यामां जाते हैं, क्योंकि जो स्कूटी भारत में 70 से 80 हजार रुपए में आ रही है, वही स्कूटी म्यामां में 35 से 40 हजार रुपए में मिल जाती है। इसी तरह भारत में जो पेट्रोल 100 से 110 रुपए लीटर तक में मिल रहा है, वही पेट्रोल म्यामां में 70 से 80 रुपए लीटर में मिल जाता है। मोरेह में रहने वाले विक्की कहते हैं कि यहां सबके पास बर्मा से लाई गई स्कूटी है। इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता और नंबर प्लेट भी नहीं मिलती। इसलिए हम लोग इसे सिर्फ लोकल में ही चला सकते हैं। विक्की के मुताबिक मोरेह से इंफाल 110 किमी की दूरी पर है। टाउन हिल्स पर बसा हुआ है। इसलिए वहां आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। इंफाल के बजाए म्यामां बगल में ही लगा हुआ है। इसलिए हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए हम लोग म्यामां जाते हैं। स्कूटी और पेट्रोल के अलावा वहां फल और कपड़े भी सस्ते मिल जाते हैं। म्यामां के लोग हर रोज सुबह 7 से 8 बजे के करीब मोरेह में दुकान लगाने आ जाते हैं। यहां पक्की दुकानें तो भारतीयों की हैं, लेकिन उनके सामने बने फुटपाथ पर लगने वाली अधिकांश दुकानें म्यामां के लोगों की हैं। कपड़ों की दुकान लगाने वाले देवानंद कहते हैं, म्यामां के लोग हर रोज यहां खरीदी करने आते हैं और हम लोग भी जाते हैं, लेकिन फिलहाल हम लोग नहीं जा रहे।
म्यामां से 35 हजार में स्कूटी और 70 रु. में पेट्रोल खरीद लाते हैं लोग