पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा का मानना है कि भारत के अन्य राज्यों की तुलना में असम पर कर्ज कम है। कर्ज लेना भारत सरकार का भी नियम है। नए साल के अवसर पर संवाददाताओं के साथ हुई बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने असम द्वारा कर्ज लेने के संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा कि उधार लेना भारत सरकार का नियम है। अगर आप भारत सरकार के बजट पर नजर डालें तो पाएंगे कि भारत सरकार भी कर्ज लेती है। जो विपक्षी दल आलोचना कर रहे हैं, वे भी जहां उनकी सरकार चल रही है वहां कर्ज लेते हैं। ऋण वित्त पोषण का एक स्रोत है। रिलायंस जब कोई उद्योग शुरू करता तो अपना पैसा नहीं लगाता, वह बैंकों से पैसा उधार लेता है। असम भारत के सबसे कम कर्ज वाले पांच राज्यों में से एक है। सीएम ने कहा कि इस साल भारत सरकार ने हमें 27,000 करोड़ रुपए उधार लेने की अनुमति दी है। हालांकि जीडीपी का 32 प्रतिशत उधार लिया जा सकता है, लेकिन हम इस साल केवल 17,000 करोड़ रुपए उधार लेंगे। कर्नाटक और महाराष्ट्र हमसे ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। भारत सरकार असम से संतुष्ट है। हमने सबसे कम कर्ज लिया है, क्योंकि हमारे पास अपने संसाधन हैं। सीएम ने यह भी कहा कि मुझे लगता है कि हमें अपनी जीडीपी बढ़ाने के लिए और अधिक उधार लेना चाहिए। हम जितना अधिक विश्वविद्यालय बनाएंगे, उद्योग लाएंगे उतना ही हमारा सकल घरेलू उत्पाद बढ़ेगा। अगर हम उधार लेकर कैंसर देखभाल के लिए 400 करोड़ रुपए की फोटॉन मशीन ले सकें, तो पूरे पूर्वी भारत से मरीज इलाज के लिए यहां आएंगे। गुवाहाटी एक चिकित्सा पर्यटन स्थल बन जाएगा। जो लोग कर्ज लेने की आलोचना कर रहे हैं, क्या जहां उनकी सरकार चल रही है, वहां कर्ज नहीं लिया जाता? असम का कर्ज सकल घरेलू उत्पाद का केवल 24 प्रतिशत है, लेकिन हम जीडीपी का 32 प्रतिशत उधार ले सकते हैं। इसलिए असम सबसे कम उधार लेने वाले राज्यों में से एक है। डॉ. शर्मा ने कहा कि 1,50,000 करोड़ रुपए की उधारी नहीं देखनी है, यह देखना है कि  जीडीपी कितनी बढ़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की जीडीपी जब 1,00,000 रुपए थी, तो वे 5,000 करोड़ रुपए उधार ले सकते थे। जब मेरी जीडीपी 7,00,000 रुपए तक पहुंच जाएगी, मैं 35,000 करोड़ रुपए उधार ले सकूंगा। भविष्य में जब किसी मुख्यमंत्री की जीडीपी 20 लाख करोड़ रुपए होगी तो वे एक साल में 1लाख करोड़ रुपए उधार ले सकेंगे। विपक्ष इस पर बात नहीं करता कि हमारी जेब कितनी बढ़ी है। 2028 तक हम एक बिलियन की अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। 2028 तक असम में 10 लाख करोड़ रुपए का घरेलू उत्पादन होगा। अगर इसका 32 प्रतिशत उधार लिया जाए तो असम का कुल कर्ज 3,20,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जब आय आपकी जेब में आ जाए तो आप भुगतान भी कर सकते हैं। इस साल मैंने तरुण गोगोई सरकार द्वारा 2014 तक लिए गए सभी ऋणों का भुगतान कर दिया। विपक्ष ने यह नहीं बताता कि तरुण गोगोई सरकार ने जो कर्ज लिया था हिमंत विश्व शर्मा ने उनकी भुगतान कर दी। 2022 में असम की जीडीपी 3,40,000 रुपए थी। 2024-25 में जीडीपी बढ़कर 7,12,000 करोड़ रुपए हो गई। सकल घरेलू उत्पाद के मामले में असम अब देश का 17वां राज्य है। हम 16वें नंबर पर आने के लिए पंजाब से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। अगर जीडीपी अभी की तरह बढ़ती रही तो हम 2028 तक मैं पंजाब से आगे निकल जाएंगे। असम एक बिलियन की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि अब से किसी राज्य कर्मचारी की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु होने पर उसके परिवार को जीवन बीमा से 10 लाख रुपऐ मिलेंगे। वहीं दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ रुपए और आंशिक चोटों के लिए 80 लाख रुपए तक का कवर मिलेगा। डॉ. शर्मा ने कहा कि लखीमपुर कैबिनेट की बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए कई शून्य लागत बीमा सेवाओं की घोषणा की गई थी। तदनुसार, बुधवार को राज्य सरकार द्वारा भारतीय स्टेट बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह योजना पहली जनवरी से प्रभावी हो गई है। किसी सरकारी कर्मचारी की प्राकृतिक कारणों, बीमारी से मृत्यु होने पर अब उसके परिवार को अन्य सरकारी लाभों के साथ भारतीय स्टेट बैंक या यूनियन बैंक से 10 लाख रुपए का बीमा का धन मिलेगा। सीएम डॉ. शर्मा ने कहा कि आज हम प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को एक और नये क्षितिज पर ले गए हैं। हम आज से तबादलों में पारदर्शिता लाना चाहते हैं। अब से राज्य सरकार के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तबादले के लिए सरकारी कार्यालयों में दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। नर्सों, फार्मासिस्टों, पुलिस कांस्टेबलों सभी को तबादलों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। यह विभिन्न मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप का भी विषय बन जाता था। हम आज स्वागत सतीर्थ नामक एक पोर्टल लॉन्च कर रहे हैं। यह पोर्टल भारत में पहला है। यह पोर्टल हर साल 1 जनवरी से 28 फरवरी तक खुला रहेगा जो तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आवेदन करना चाहते हैं वे पांच जिलों का विकल्प देकर आपसी सहमति के आधार पर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। 14 अप्रैल से पहले कंप्यूटर आवेदन लोड कर ट्रांसफर प्रभावी कर देगा। स्थानांतरण आदेश निदेशक के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी किया जाएगा। यहां कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।