सदन मोहन महाराज
गुवाहाटी : हर साल की तरह इस साल भी सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है और सुबह-शाम ठंड भी लगने लगी है। जहां घरों में एसी, कूलर चल रहे थे तो वहीं अब इनकी जगह रजाई-कंबल ने ले ली है, वहीं इस मौसम में लोग अब अन्य उपाय भी कर रहे हैं ताकि शरीर को गर्मी दी जा सके। लेकिन शायद आप ये नहीं जानते होंगे कि अगर सच में सर्दी से बचना है, तो आपको अंदरूनी रूप से मजबूत होना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि कुछ ऐसी चीजों का सेवन किया जाए जो हमें ठंड से बचाने में मदद कर सके। उल्लेखनीय है कि बारिश रुकने के बाद मौसम में आए बदलाव के कारण बीमारियां बढ़नी शुरू हो जाती हैं। खांसी, जुकाम व बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। अस्पतालों में सुबह से भीड़ लग जाती है। अस्पताल में इन दिनों काफी संख्या में सर्दी,खांसी और बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि इनमें कोविड के मरीज भी पाए जा रहे हैं जो चिंता का विषय है। चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण पर तो काफी हद तक लगाम लग चुका है, लेकिन इसके लक्षणों में शामिल खांसी, जुकाम, बुखार से लोगों को कोरोना का भी डर सता रहा है। कुछ लोग तो संक्रमण की जांच करा रहे हैं, वहीं कुछ लोग जांच कराने से कतरा भी रहे हैं। इस सिलसिले में गुवाहाटी मेडिकल कालेज अस्पताल (जीएमसीएच) के प्रिंसिपल डा.अच्युत वैश्य ने पूर्वांचल प्रहरी को बताया कि मौसम में आए बदलाव के कारण लोग बुखार, खांसी जुकाम आदि बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल में सामान्य दिनों की अपेक्षा अभी भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉ.वैश्य ने साफ करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा के बाद से अब तक कोरोना की दर छह प्रतिशत से सात प्रतिशत है। उनका कहना है कि अस्पताल में पहुंचने वाले मरीज बुखार, सर्दी-जुकाम व खांसी के ज्यादा हैं। मौसम में हर रोज बदलाव हो रहा है, रात के समय तापमान ज्यादा गिर रहा है तो दिन में गर्मी हो रही है। इसलिए लोग लापरवाही नहीं बरतें, जो लोग लापरवाही बरत रहे हैं, वही वायरल फीवर का शिकार हो रहे हैं। वैसे तो सामान्य बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं, लेकिन आशंका होने वाले मरीजों की कोविड की जांच भी कराई जा रही है। मारवाड़ी अस्पताल के डॉ.दिनेश अग्रवाल ने कहा कि बदलते मौसम में सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। कोविड के बीच बढ़ती सर्दी, खांसी और बुखार को गंभीरता से लेना जरूरी है। डॉ.अग्रवाल ने लोगों से बेहद सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा के बाद से कोविड मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके साथ ही मौसमी बुखार के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। इन दोनों के अलावा डेंगू के मरीज भी पाए जाने लगे हैं। इन तमाम बीमारियों से बचने के लिए अगर हम मास्क और सामाजिक दूरियों का पालन करते हैं तो कोविड के अलावा अन्य मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं। आयुर्वेदे की चिकित्सक डा. ममता मिश्रा ने कहा कि बदलते मौसम का सबसे पहला असर व्यक्ति की सेहत पर पड़ता है। ऐसे में लोग सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की समस्या से परेशान होने लगते हैं। यूं तो ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम व खासंी की समस्या आम बात है, लेकिन कभी-कभी ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को सांस लेने तक में तकलीफ होने लगती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान बारिश नहीं होने से वातावरण में धूल की मात्रा अधिक हो जाती है। साथ ही मौसम ठंड होने पर इस तरह की बीमारी तेजी से फैलती है। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में हमारे शरीर की अग्नि मंद पड़ जाती है जिससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमत कम हो जाती है। इसके लिए आयुर्वेदिक तथा घरेलु नुस्खे और प्राणायाम के जरिए ठीक कर सकते हैं। डॉ.मिश्रा ने कहा कि चिकित्सकों की सलाह के बाद अपने नैसर्गिक बल बनाए रखने के लिए दैनिक भोजन को समय से ग्रहण करने, अजमाइन, जीरा, हल्दी, तेजपात, काली मीर्च, तुलसी के पत्ते आदि का सेवन कर रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। साथ ही सुबह प्राणायम भी कर सकते हैं।