प्रयागराज : 2025 का महाकुंभ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लोकसभा 2024 से देश में एक आम चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद कौन? लेकिन इसका इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी के दावेदार के रूप में अक्सर तीन नेताओं के नाम की चर्चा होती है, जिसमें अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस का नाम शामिल है। वहीं आरएसएस के उच्चस्तरीय सूत्रों से संकेत मिल रहे हैं कि प्रयागराज में होने वाले इस कुंभ में बीजेपी के अगले प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम प्रस्तावित हो सकता है। हालांकि, इस बार यह प्रक्रिया 2013 की तरह प्रत्यक्ष नहीं होगी। आरएसएस के एक प्रांत स्तरीय पदाधिकारी के अनुसार, इस बार भी हिंदू समाज और संतों के बीच पीएम कैंडिडेट को लेकर चर्चा होगी। लेकिन चूंकि लोकसभा चुनाव 2029 में होंगे, इसलिए योगी आदित्यनाथ के नाम को धीरे-धीरे प्रोजेक्ट किया जाएगा, न कि तात्कालिक रूप से घोषित किया जाएगा। 2013 में प्रयागराज में हुए कुंभ ने भारतीय राजनीति का रुख बदल दिया था। उस समय नरेंद्र मोदी को बीजेपी का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने की योजना आरएसएस और संत समाज ने मिलकर बनाई थी। धर्म संसद के अंतिम दिन, हजारों संतों की उपस्थिति में नरेंद्र मोदी के नाम पर सहमति बनी। इस निर्णय को संत समाज ने पूरे देश में फैलाया और यह संदेश सीधे जनता तक पहुंचा। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल ने 2012 से ही नरेंद्र मोदी का नाम आगे बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया था। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी इस प्रस्ताव पर राजी किया। नारायणी संप्रदाय के संतों और वासुदेवानंद शंकराचार्य ने भी मोदी का समर्थन किया। इसके बाद धर्म संसद में मोदी के नाम पर मुहर लगी। आरएसएस के सूत्र बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ के नाम पर धीरे-धीरे सहमति बन रही है। हिंदू समाज और साधु-संतों के बीच योगी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में रैलियों के जरिए पार्टी को मजबूती दी। हाल ही में, महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में योगी आदित्यनाथ के 'बंटेंगे तो कटेंगेÓ नारे का बड़ा असर दिखा। उनके प्रचार के चलते 15 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। यह नारा आरएसएस के विचारों को प्रकट करता है, जो हिंदू समाज की एकता को बनाए रखने पर जोर देता है। आरएसएस और संत समाज ने 2025 के कुंभ को एक बड़ा मंच बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार हिंदू समाज की एकता को मजबूत करने के साथ-साथ कई नई पहल की जा सकती हैं। लिंगायत मठ और नॉर्थ-ईस्ट जनजातियों को न्योता : कुंभ में पहली बार लिंगायत समुदाय और नॉर्थ-ईस्ट की प्रमुख जनजातियों जैसे कुकी, मैतेई, देवरी आदि को विशेष तौर पर आमंत्रित किया जाएगा। 10.5 करोड़ की आबादी वाले आदिवासी समुदाय के गुरु और संतों को भी कुंभ में संतों के साथ स्नान का मौका मिलेगा। वहीं साध्वियों की आवाज और उनके विचारों को स्थान देने के लिए विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आरएसएस और अखाड़ा परिषद 2025 कुंभ में सनातन बोर्ड का प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। यह बोर्ड हिंदू धर्म से जुड़े मुद्दों और धार्मिक स्थलों की देखभाल के लिए एक केंद्रीय मंच होगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा कि सनातन धर्म को एकजुट करने के लिए यह कदम आवश्यक है। पिछली बार की तरह इस बार कुंभ में धर्म संसद आयोजित नहीं होगी। इसके बजाय, कई विषयों पर चर्चा और प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। 25-26 जनवरी 2025 को संत सम्मेलन में इन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। आरएसएस और संत समाज के बीच योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम भी चर्चा में है।
2025 के कुंभ में होगी बीजेपी के अगले पीएम उम्मीदवार पर चर्चा