विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने बुधवार को कहा है कि अगले तीन महीनों में ला नीना परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं। लेकिन यह चरण अपेक्षाकृत कमजोर और अल्पकालिक होने की संभावना है। डब्ल्यूएमओ के वैश्विक दीर्घकालिक पूर्वानुमान केंद्रों के लेटेस्ट डेटा के अनुसार, वर्तमान तटस्थ परिस्थितियों में परिवर्तन होने की 55 फीसदी संभावना है। ला नीना प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्य रेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के बड़े पैमाने पर ठंडे होने को दिखाता है। इसके साथ हवा, दबाव और वर्षा में बदलाव देखने को मिलता है। एल नीनो इसका विपरीत है, जिसमें समुद्र गर्म होता है। भारत में एल नीनो से गर्मी ज्यादा पड़ती है और मानसून कमजोर होता है। वहीं, ला नीना से मजबूत मानसून, औसत से ज्यादा वर्षा और सर्दियों में ठंड बढ़ती है। हालांकि डब्ल्यूएमओ ने चेतावनी दी है कि प्राकृतिक जलवायु घटनाएं जैसे ला नीना और एल नीनो मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही हैं। मानवजनित बदलाव वैश्विक तापमान बढ़ा रहे हैं। मौसम की चरम स्थितियों को बढ़ा रहे हैं और मौसमी वर्षा व तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं। डब्ल्यूएमओ महासचिव सेलेस्ट साउलो ने कहा कि 2024 की शुरुआत एल नीनो के साथ हुई और यह अब तक का सबसे गर्म साल बनने की ओर बढ़ रहा है। भले ही ला नीना विकसित हो, इसका अल्पकालिक ठंडा प्रभाव वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों से होने वाली गर्मी को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। महासचिव ने आगे कहा कि मई से एल नीनो या ला नीना की अनुपस्थिति के बावजूद हमने असाधारण मौसम की घटनाएं देखी हैं, जिसमें रिकॉर्ड तोड़ बारिश और बाढ़ शामिल हैं, जो अब बदलती जलवायु में सामान्य हो गई है।' एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागर में ठंडक लाने में कठिनाई हो रही है। सितंबर और अक्तूबर 2024 में वायुमंडलीय स्थितियां भी ठंडक के अनुकूल नहीं थीं। नवंबर 2024 के अंत तक महासागरीय और वायुमंडलीय अवलोकन अभी भी तटस्थ परिस्थितियों को दिखाते हैं।
ला नीना क्या है जो लाता है समुद्र में ठंड? मार्च से पहले आने की भविष्यवाणी
