पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : जहां राज्य सरकार बेरोजगार युवाओं को स्वावलंबन योजना के नाम पर लाखों रुपए दे रही है वहीं पिछले 4 वर्षों में राज्य में सैकड़ों उद्योग बंद हो गए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि जुलाई 2020 से पिछले साल नवंबर तक असम में 103 एमएसएमई उद्यमों पर हमेशा के लिए ताला लग गया। नगांव और कछार पेपर मिलों के बाद योगीघोपा में अशोक पेपर मिल, बरुवा बामुनगांव में चीनी मिल, शिलघाट में जूट मिल और नामरूप में उर्वरक कारखाना बंद होने के बाद भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में असम में 99 लघु उद्योग, 2 हल्के उद्योग और 2 मध्यम उद्योग बंद हो गए। सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का अभाव में असम के उभरते एमएसएमई उद्योग असमय में ही मर गए। जहां राज्य के 33 लाख पंजीकृत बेरोजगार नौकरियों के लिए बेताब हैं, वहीं उद्योगों ने रोजगार के अवसर खोले हैं। इसी समय एक के बाद एक सरकारी वित्त पोषित उद्योग मौत की घंटी बजा रहे हैं। रोजगार सृजन में योगदान देने वाले और बेरोजगारी रोकने में अहम भूमिका निभाने वाले सैकड़ों एमएसएमई बंद हो गए हैं जिसके कारण बड़ी संख्या में बेरोजगारों की आजीविका संकट में हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि ये उद्योग केंद्र सरकार की उद्यम योजना की वित्तीय सहायता से स्थापित किए गए थे। उद्यमियों को सर्वाधिक 5 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया गया था। मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्थापित उद्योग कोविड महामारी के बाद बुरी स्थिति में थे। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों की आवश्यक सहयोग प्रदान करने में विफलता के कारण आशाजनक उद्योगों की असमय ही मृत्यु हो गई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, पिछले 4 वर्षों में देश में 61,469 एमएसएमई बंद हो गए। हालांकि, जहां असम में सैकड़ों उद्योग बंद हो गए, वहीं पड़ोसी मेघालय में केवल तीन, मिजोरम में 26 और नागालैंड में 25 उद्योगों पर ताला लग गया।
पिछले चार सालों में राज्य के 109 उद्योगों पर लग गया ताला