पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी :आईआईटी गुवाहाटी समेत देश के तीन उच्च शिक्षा संस्थानों के सर्वेक्षण में बाढ़ के लिए मशहूर कृषि राज्य असम में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। आईआईटी गुवाहाटी द्वारा आईआईटी मंडी और सेंटर फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी स्टडीज, बैंगलोर के सहयोग से किए गए एक अध्ययन में प्रकाश में आया है कि देश के 11 सबसे अधिक जोखिम वाले बाढ़ और सूखा प्रवण जिलों में से असम में 5 जिले शामिल हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा भारत के लिए जिला स्तरीय जलवायु जोखिम आकलन शीर्षक वाली रिपोर्ट में असम के चराइदेव, शिवसागर, डिब्रूगढ़, गोलाघाट और दक्षिण सालमारा-मनकचर जिलों को बाढ़ और सूखे के सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों के रूप में पहचाना गया है। उच्च बाढ़ और सूखा जोखिम श्रेणी में देश के अन्य 11 जिलों में बिहार में पटना जिला, केरल में अलाप्पुझा जिला, मध्य उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद, नादिया और उत्तरी दिनजानपुर जिले शामिल हैं। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का आकलन करने वाली रिपोर्ट असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उड़ीसा और जम्मू और कश्मीर के लगभग 85 प्रतिशत जिलों को उच्च बाढ़ जोखिम वाले जिलों के रूप में वर्गीकृत करती है। इनमें से 118 जिलों की पहचान उच्च जोखिम वाले जिलों के रूप में की गई है जबकि 51 जिलों की पहचान बहुत अधिक जोखिम वाले जिलों के रूप में की गई। वहीं दूसरी ओर उच्च सूखा जोखिम श्रेणी में 85 प्रतिशत जिले बिहार, असम, झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, केरल, उत्तराखंड और हरियाणा में हैं। अति उच्च सूखा जोखिम प्रवण के रूप में चिह्नित 91 जिले और उच्च सूखा जोखिम प्रवण के रूप में पहचाने गए 188 जिले मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, असम, उड़ीसा और महाराष्ट्र में हैं। आईआईटी सर्वेक्षण में असम के चराइदेव, शिवसागर, डिब्रूगढ़, गोलाघाट और दक्षिण सालमारा मनकाचर जिलों को देश के उन 11 जिलों में शामिल किया गया है, जो बाढ़ और सूखे दोनों के खतरे का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के लंच पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में डीएसटी के वैज्ञानिक विभाग की प्रमुख डॉ. अनीता गुप्ता; पियरे-यवेस पिटेलौड, आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (सीसीए) पर वरिष्ठ क्षेत्रीय सलाहकार, स्विस विकास और सहयोग एजेंसी (एसडीसी); डॉ. सुशीला नेगी, वैज्ञानिक-एफ, डीएसटी और डॉ. स्वाति जैन डीएसटी वैज्ञानिक-ई उपस्थित रहे। इसके अलावा आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर देवेन्द्र जलिहाल और आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा वर्चुअली उपस्थित थे। रिपोर्ट में योगदान देने वाले प्रमुख शोधकर्ताओं में आईआईएससी बैंगलोर के प्रोफेसर रवींद्रनाथ, सीएसटीईपी बैंगलोर के डॉ. इंदु के मूर्ति, आईआईटी मंडी के डॉ. श्यामश्री दासगुप्ता और आईआईटी गुवाहाटी के डॉ. अनामिका बरुवा शामिल थे।
बाढ़ व सूखे के खतरे वाले देश के 11 जिलों में असम के 5 : रिपोर्ट