कलियुग में भगवान शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शिवपुराण में विविध व्रतों का उल्लेख है, जिसमें प्रदोष व्रत अत्यन्त चमत्कारी माना गया है। प्रदोष व्रत से दु:ख-दारिद्र्य का नाश होता है। जीवन में सुख-समृद्धि खुशहाली आती है, जीवन के समस्त दोषों के शमन के साथ ही सुख-समृद्धि का सुयोग बनता है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि जो प्रदोष बेला में मिलती हो, उसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोषकाल का समय सूर्यास्त से 48 मिनट या 72 मिनट तक माना गया है, इसी अवधि में भगवान् शिवजी की पूजा प्रारम्भ करने की परम्परा है। ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार 13 दिसंबर, शुक्रवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 दिसंबर, गुरुवार को रात्रि 10 बजकर 27 मिनट पर लगेगी जो कि 13 दिसंबर, शुक्रवार को सायं 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। भरणी नक्षत्र 13 दिसंबर, शुक्रवार को प्रात: 7 बजकर 50 मिनट से उसी दिन अद्र्धरात्रि के पश्चात 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। प्रदोष बेला में त्रयोदशी तिथि का मान 13 दिसंबर,शुक्रवार को होने के फलस्वरूप प्रदोष व्रत इसी दिन रखा जाएगा। अभीष्ट की पूर्ण के लिए 11 प्रदोष व्रत या वर्ष के समस्त त्रयोदशी तिथियों का व्रत अथवा मनोकामना पूर्ण होने तक प्रदोष व्रत रखने की मान्यता है। हर दिन (वार) के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ : ज्योतिषविद् ने बताया कि प्रत्येक दिन के प्रदोष व्रत का अलग-अलग महत्त्व है। वारों (दिनों) के अनुसार सात प्रदोष व्रत बतलाए गए हैं, जैसे—रवि प्रदोष-आयु, आरोग्य, सुख-समृद्धि, सोम प्रदोष-शान्ति एवं रक्षा तथा आरोग्य व सौभाग्य में वृद्धि, भौम प्रदोष-कर्ज से मुक्ति, बुध प्रदोष-मनोकामना की पूर्ण, गुरु प्रदोष-विजय व लक्ष्य की प्राप्ति, शुक्र प्रदोष-आरोग्य, सौभाग्य एवं मनोकामना की पूर्ण, शनि प्रदोष-पुत्र सुख की प्राप्ति। प्रदोष व्रत का विधान : उन्होंने बताया कि व्रतकताको प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना के पश्चात् दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गन्ध व कुश लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सम्पूर्ण दिन निराहार रहते हुए सायंकाल पुन: स्नान कर स्वच्छ व धारण करके पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर प्रदोषकाल में भगवान शिवजी की विधि-विधान पूर्वक पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भगवान शिवजी को क्या करें अॢपत : भगवान शिवजी का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगन्धित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि जो भी सुलभ हो, अर्पित करके शृंगार करना चाहिए।
शुक्र प्रदोष व्रत से होंगे शिवजी प्रसन्न
