नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव के नोटिस को लेकर बुधवार को सत्तारूढ़ और विपक्षी सांसदों के बीच रार देखने को मिली जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) नेताओं ने इस कवायद को 'राजनीति से प्रेरित करार दिया तो वहीं विपक्षी 'इंडिया गठबंधन के सदस्यों ने राज्यसभा के सभापति पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने बुधवार को कहा कि सदन के सभापति जगदीप धनखड़ अपनी अगली पदोन्नति के लिए सरकार के प्रवक्ता बनकर काम कर रहे हैं और उनके आचरण ने देश की गरिमा को बहुत नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया के घटक दलों के नेताओं के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह दावा भी किया कि राज्यसभा में गतिरोध का सबसे बड़ा कारण खुद उपराष्ट्रपति धनखड़ हैं। 'इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस सौंपा था। खडग़े ने कहा कि आज तक किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अनुच्छेद 67 के तहत प्रस्ताव नहीं लाया गया, क्योंकि वे हमेशा निष्पक्ष रहे और राजनीति से दूर रहे। उन्होंने कहा कि  हमको यह कहना पड़ता है कि आज नियम को छोड़कर राजनीति ज्यादा हो रही है। खडग़े ने कहा कि हमें अफसोस है कि संविधान को अंगीकार किए जाने के 75वें वर्ष में उपराष्ट्रपति के पक्षपातपूर्व आचरण के चलते हम यह प्रस्ताव लाने को मजबूर हुए हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि नोटिस का उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व और अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस के बीच कथित संबंधों के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना है। शिक्षा राज्य मंत्री ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि जो अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, वह किसी गैर मुद्दे को मुद्दा बनाकर किसी बात को छिपाने के लिए लाया गया है। यह सोनिया गांधी के साथ जॉर्ज सोरोस के संबंध को छिपाने के लिए है क्योंकि अगर यह सामने आता है तो कांग्रेस के लिए समस्याएं होंगी। यह मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए है। मत्स्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस मुद्दे पर सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को निशिकांत दुबे ने लोकसभा में और सुधांशु त्रिवेदी ने राज्यसभा में उठाया था। जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति धनखड़ के खिलाफ 'अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा, उपराष्ट्रपति जो कुछ भी करते हैं, वह नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं। ऐसा (नोटिस) नहीं किया जाना चाहिए था। धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के नोटिस के बारे में पूछे जाने पर राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि सदन परंपरा और परिपाटी के अनुसार चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक प्रस्ताव है। मैं जानता हूं कि भाजपा इसे स्वीकार नहीं होने देगी, भले ही उनके पास संख्या बल हो। उन्हें इस मामले पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन को अपनी परंपरा के अनुसार चलना चाहिए, आप केवल पिछले 2-3 वर्षों की सदन की कार्यवाही देख लें और आपको पता चल जाएगा कि सदन कैसे कार्य कर रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता और राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने राज्यसभा के सभापति और उपसभापति पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में जो हो रहा है वह अप्रत्याशित है। हम इस स्तर पर कभी नहीं आए थे। पीठासीन अधिकारी आते हैं, सत्ता पक्ष, विपक्ष पर प्रहार करता है, व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं... ये पूरी तरह से प्रक्रिया के नियमों और कार्य संचालन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कल भी जब उन्होंने (सत्ता पक्ष) राहुल गांधी का नाम लिया तो मैंने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। सभापति ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखा गया है। आज भी उन्होंने (सत्तापक्ष) सोनिया गांधी जी के बारे में बात की, आरोप लगाए। जो लोग विपक्षी दलों के खिलाफ बोलना चाहते थे, उन्हें अनुमति दी गई, उन्होंने हममें से किसी को भी बोलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जब उपसभापति पीठासीन हुए तो उन्होंने सदन के नेता को सब कुछ बोलने की अनुमति दी, लेकिन विपक्ष की तरफ रुख तक नहीं किया। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा की उप नेता सागरिका घोष ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के खिलाफ नोटिस किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र को बचाने का प्रयास है।