नई दिल्ली : भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए भारत डाइनैमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने रूस से नई डील की है। ये डील एडवांस पांत्सिर एयर डिफेंस मिसाइल गन सिस्टम के लिए रूस सरकार के नियंत्रण वाली हथियार एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (आरओई) के साथ की गई है। पांत्सिर एयर डिफेंस सिस्टम वर्सेटाइल मोबाइल प्लेटफॉर्म है, जो आर्मी बेस और अन्य इन्फ्रास्ट्रख्र को हवाई हमलों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है, इसमें एयरक्राफ्ट, ड्रोन और सटीक निर्देशित युद्ध सामग्री शामिल है। इसमें एडवांस रडार और ट्रैकिंग सिस्टम है। जो 36 किमी. दूर और 15 किमी. की ऊंचाई तक के टारगेट का पता लगाने और अटैक करने की सक्षम है। दोनों देशों के बीच ये इस डिफेंस सिस्टम के लिए समझौता गोवा में आयोजित 5वें भारत-रूस इंटर गवर्नमेंटल कमिशन सबग्रुप मीटिंग के दौरान हुआ। डील मेक इन इंडिया इनिशिएटिव का हिस्सा बीडीएल और आरओई का टारगेट पांत्सिर वैरिएंट के मैन्यूफैक्टरिंग, टेक्नॉलिजी ट्रांसफर और जॉइंट डेवलपमेंट के लिए नए रास्ते तलाशना है। ये मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत डिफेंस प्रोडक्शन में सेल्फ डिपेंड होने के लिए भारत के टारगेट में शामिल है। भारत ने साइन की थी 5 अरब डॉलर की डील भारत ने 2018 में रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए डील की थी। इस डील के तहत अगले 5 सालों में भारत को ये सभी एयर डिफेंस सिस्टम मिलने थे। भारत को अभी तक रूस ने सिर्फ 3 ही एयर डिफेंस सिस्टम भारत को दिए है। अभी भी 2 एस-400 भारत को मिलना बाकी हैं। इसके पीछे की एक बड़ी वजह यूक्रेन जंग को माना जा रहा है, जिसके चलते एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी में देरी हो रही है। भारत में मैंगो मिसाइल बनाने की डील रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी रोस्टेक ने इसी साल जून महीने में बताया था कि उसने भारत में मैंगो मिसाइल की मैन्युफैख्रिंग के लिए काम शुरू किया है। मैंगो मिसाइल एक तरह के शेल्स यानी गोले होते हैं, जिन्हें टैंक की मदद से फायर किया जाता है। रोस्टेक ने बताया कि वो भारत में बारूद के उत्पादन को लेकर भी प्लान बना रही है। 125 मिमी कैलिबर की टैंक गन से फायर होने वाले ये शेल्स या गोले कवच से लैस टैंकों और आर्मर्ड वाहनों को फाड़कर अंदर घुसने में सक्षम हैं। ये गोले टैंकों की मजबूत बाहरी संरचना को भेद सकते हैं, उनमें प्रवेश कर सकते हैं और फिर फट सकते हैं। आसान भाषा में कहें तो जब इसे टैंक से फायर किया जाता है तो ये सबसे पहले टारगेट को फाड़कर अंदर घुसता है और उसके बाद ब्लास्ट हो जाता है। ये शेल्स 2000 मीटर की दूरी तक 60 डिग्री के कोण से 230 मिमी के स्टील को भेद सकता है। इसके अलावा सीधे यानी 0 डिग्री पर फायर करने पर ये 520 मिमी के स्टील को फाड़ सकता है।