गुवाहाटीः कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज राज्यभर में लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया गया। चार दिवसीय छठ त्योहार के मौके पर आज शाम को लाखों व्रतियों एवं अन्य श्रद्धालुओं की ओर से अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया, वहीं कल शुक्रवार को प्रातःकालीन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व संपन्न हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि भगवान सूर्य जो प्रत्यक्ष देवता और पंचदेवों में से एक हैं, उन्हें आमतौर पर जब सुबह में उगते हैं तो जल चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन छठ ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। हर वर्ष छठ महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक छठ का पर्व चलता है। मालूम हो कि आज सूबे की राजधानी शहर गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के विभिन्न घाटों, तलाबों, घरों के परिसरों के साथ ही छठ व्रत के पालन करने वाले महिलाओं एवं पुरुषों के साथ ही अन्य लोगों ने अपनी-अपनी छतों पर भी सारी व्यवस्था के साथ भगवान भास्कर को संध्या अर्घ्य अर्पित किए। उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी के अलावा तिनसुकिया, जोरहाट, नगांव, तेजपुर, विश्वनाथ सहित सभी शहरों के अलावा गांवों में रहने वाले अधिकांश हिंदीभाषी समुदाय के लोगों ने इस महान त्योहार के दौरान अपने आराध्य देव भगवान सूर्य और छठी मइया की पूजा की। उल्लेखनीय है कि दोपहर एक बजे से ही व्रती अपने परिवार के साथ घाटों पर पहुंचने लगे। कई लोग वाहनों से तो कोई पैदल तो कोई दंडव्रत प्रणाम करते हुए घाट तक पहुंचकर इस महापर्व में शामिल हुए। मालूम हो कि पिछले कुछ वर्षों के बाद इस बार छठ घाटों पर सबसे अधिक भीड़ देखी गई। लोगों में उत्साह चरम पर है। उल्लेखनीय है कि राज्यभर में छठ घाट पर सत्तारूढ के साथ विपक्ष के नेताओं ने भी छठ घाट पर आए और भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की। यहां बताते चलें कि इस त्योहार में छठ महापर्व के पहले दिन नहाय खाय, दूसरे खरना, तीसरे दिन सूर्यास्त के समय सूर्यदेव को अर्घ्य और छठी माता की पूजा करने के बाद आखिरी दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है। छठ का त्योहार सभी कठोर व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत, सुख-समृद्धि के लिए व्रत के कठोर नियमों का पालन करते हुए व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ छठी माता और सूर्यदेव की पूजा व अर्घ्य देती हैं। छठ का तीसरे दिन व्रती महिलाएं अपने परिवार वालों के साथ एकत्रित होकर किसी पवित्र नदी या तालाब के किनारे सूर्यास्त के समय पानी में उतरकर सूर्यदेव का अर्घ्य देकर भगवान सूर्य और छठी माई की सुख.समृद्धि की कामना करने की यह परंपरा सदिया से चली आ रही है। मालूम हो कि इस दौरान अल्फा द्वारा किसी भी तरह के कुठाराघात के मद्देनजर जिला प्रशासन की ओर से घाटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। व्रतियों द्वार अर्घ्य देने से पूर्व सभी घाटों पर गहन तलाशी और डॉग स्कॉट से जांच-पड़ताल की गई थी। वहीं घाटों पर पूजा समितियों द्वार भी व्यवस्था दुरुस्त की गई थी।
राज्यभर में छठ पूजा पर व्रतियों ने डूबते सूर्यदेव को दिया अर्घ्य