पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम सरकार को ग्वालपाड़ा के मटिया स्थित डिटेंशन कैंप में संदिग्ध नागरिकों को पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगले महीने के भीतर डिटेंशन कैंप के बंदियों को यह सुविधा मुहैया करायी जाए। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मासी की खंडपीठ ने डिटेंशन कैंप पर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि असम में हिरासत शिविरों की समग्र स्थिति अप्रत्याशित है। कैदियों को न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाओं से भी वंचित किया जा रहा है। शिविरों में कोई महिला डॉक्टर तक नहीं है। जस्टिस ओका ने सवाल किया कि ऐसा कैसे हो सकता है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट  की ओर से निर्देशित जांच के बाद खंडपीठ ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की ओर से प्रस्तुत एक रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार की आलोचना की और उसे एक महीने के भीतर डिटेंशन कैंप में कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डिटेंशन कैंप में लोगों के साथ सामान्य अपराधियों जैसा व्यवहार न करने का निर्देश जारी किया था। कानूनी सेवा प्राधिकरण की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति ओका ने असम सरकार के संबंधित विभागों की भी आलोचना की और हिरासत शिविरों की दुर्दशा पर कई सवाल उठाए। पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से पूछा कि  शिविरों की क्या स्थिति है! न तो पानी है और न ही न्यूनतम शौचालय की सुविधा। पर्याप्त भोजन या चिकित्सा देखभाल नहीं है! यह कैसे संभव हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मुख्य रूप से ग्वालपाड़ा जिले के मटिया कैंप से जुड़े इन सवालों का समाधान करने का निर्देश जारी किया है। कोर्ट अगली सुनवाई 9 दिसंबर को करेगा।