पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : गौहाटी हाई कोर्ट ने कचुतली के निवासियों की बेदखली को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। गौहाटी हाईकोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार सोनापुर के कचुतली में ट्राइबेल बेल्ट और ब्लॉक की घोषणा से पहले से रह रहे तथा जमीन का पट्टा रखने वाले गैर-आदिवासी लोगों को बेदखल नहीं कर सकेगी। कचुतली में रह रहे कुछ लोगों को प्रशासन की ओर से बेदखली की नोटिस मिलने पर उन्होंने गौहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर  की और नतीजतन अदालत के निर्देशानुसार प्रशासन को बेदखली अभियान  अस्थायी तौर पर निलंबित करना पड़ा। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सोनापुर के आदिवासी इलाके में अतिक्रमण और बेदखली के नाम पर कुछ मुसलमानों को बेदखली का नोटिस जारी किया था। 13 और 14 सितंबर को कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के अंतर्गत सोनापुर राजस्व मंडल अधिकारी ने मकान खाली करने के लिए तीन दिन की समय- सीमा निर्धारित करघर-घर नोटिस चस्पा किए थे। बेदखली नोटिस के बाद क्षेत्र के कई निवासियों ने गौहाटी हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे 100 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। कामरूप महानगर जिला प्रशासन से बेदखली के नोटिस मिल रहे कुछ लोगों ने बताया कि सोनापुर के कचुतली इलाके को 1950 में आदिवासी एन्क्लेव घोषित करने से पहले से ही वहां रह रहे थे। उन्होंने ब्रिटिश काल के दौरान 1923 में प्राप्त अस्थायी भूमि पट्टे और बाद में प्राप्त स्थायी भूमि पट्टे के साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए। हालांकि, असम सरकार के महाधिवक्ता ने गौहाटी हाई कोर्ट के एक जनहित से जुड़े मामले संख्या 78/2012 के तहत 2019 के 9 दिसंबर में जारी एक फैसले पर अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए उसके आधार पर वादी पक्ष के तर्क का खंडन किया, लेकिन वादी पक्ष के वकील ने इस तर्क का खंडन किया और ट्राइबेल बेल्ट में बड़े पैमाने पर बेदखली के बजाय सुप्रीम कोर्ट की ओर से निजी स्तर पर अतिक्रमण की जांच कर बेदखली का आदेश देने की बात पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद गौहाटी हाई कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया और वादी को आवास और भूमि पट्टे के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ 30 सितंबर तक कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिला आयुक्त के पास आवेदन करने का भी निर्देश दिया। उक्त आवेदनों का परीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित लोग टाइबेल ब्लैट की घोषणा से पहले से ही या 1923 से उक्त क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। जो लोग उक्त क्षेत्र में 1923 से पहले से रह रहे हैं और उनके पास मियादी पट्टा है उन्हें 1986 के राजस्व अधिनियम के तहत बेदखल नहीं किया जा सकता। जिला आयुक्त को प्रत्येक आवेदक के संबंध में अलग-अलग निर्देश जारी करने होंगे। मामले की सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया कि जब तक जिला आयुक्त आवेदनों की जांच कर निर्देश जारी नहीं करते तब तक बेदखली कार्रवाई निलंबित रहेगी। यानी, जब तक जिला आयुक्त बेदखली नोटिस जारी करने वाले लोगों की भूमि स्वामित्व सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेते तब तक बेदखली अभियानअस्थायी रूप से निलंबित रहेगा। हालांकि, जो लोग ट्राइबेल बेल्ट की घोषणा के बाद कचुतली में आकर बस गए हैं उनका निष्कासन तय हो गया है।