भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक हर माह के तिथि के पर्व कीअपनी खास पहचान है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि प्रत्येक माह की अमावस्या तिथि में कुशोत्पाटनी एकादशी तिथि की विशेष महिमा है। इस तिथि के दिन कुशा नामक घास का उत्पाटन किया जाता है। वैदिक कर्मकाण्डी ब्राह्मण वर्ग धार्मिक व मांगलिक कृत्यों को सम्पन्न करवाने के लिए शुभ मुहूर्त में कुश का उत्पाटन कर वर्ष भर के लिए संग्रह करते हैं। भाद्रपद की अमावस्या तिथि के दिन ही कुश का उत्पाटन किया जाता है। भाद्रपद कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि कुशोत्पाटनी अमावस्या तिथि के नाम से जानी जाती है। आज के दिन हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में किसी न किसी रूप में कुश का प्रयोग अवश्य होता है। इस बार सोमवार, 2 सितंबर को कुशोत्पाटनी अमावस्या एवं सोमवती अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि के दिन पूर्ण श्रद्धा, अस्था व भक्ति के साथ व्रत उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए। विमल जैन ने बताया कि भाद्रपद कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि रविवार, 1 सितंबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 5 बजकर 42 मिनट पर लगेगी जो कि मंगलवार, 3 सितंबर को प्रातः 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। मघा नक्षत्र रविवार, 1 सितंबर को रात्रि 9 बजकर 49 मिनट पर लगेगी जो कि सोमवार, 2 सितंबर को रात्रि 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र लग जाएगा जो मंगलवार, 3 सितंबर को अर्द्धरात्रि के पश्चात् 3 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इस दिन सोमवार, 2 सितंबर को शिवयोग तथा मंगलवार, 3 सितंबर को सिद्धयोग सम्पूर्ण दिन रहेगा। स्नान-दान-श्राद्धादि की अमावस्या सोमवार, 2 सितंबर को तथा स्नान-दानादि की भौमवती अमावस्या मंगलवार, 3 सितंबर को मनाया जाएगा। पीपल वृक्ष की है विशेष महिमा : प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर ध्यान-पूजा के पश्चात् दाहिने हाथ में पुष्प, फल, गन्ध, कुश व जल लेकर अमावस्या तिथि पर किए जाने वाले पूजा का संकल्प लेना चाहिए। पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है। पितरों के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है।
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