पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : ऊपरी असम में जातीय संगठनों द्वारा शुरू किया गया मियां विरोधी अभियान का दुष्प्रभाव पूरे असम में देखा जा रहा है। शिवसागर में कुछ संगठनों की ओर से संदिग्ध मियां लोगों को ऊपरी असम छोड़ने के लिए समय सीमा निर्धारित किए जाने के बाद मियां और अल्पसंख्यक मुसलमान समूहों में ऊपरी असम छोड़ने लगे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि मियां श्रमिकों की कमी के कारण ऊपरी असम में चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्गों सहित लगभग सभी निर्माण कार्य ठप हो गए हैं। मजदूरों की कमी के कारण जोरहाट से शिवसागर तक चार लेन राजमार्ग का निर्माण पिछले एक सप्ताह से रुका हुआ है। जोरहाट के टियोक में मेसर्स एमपी अग्रवाल कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी में कार्यरत सैकड़ों मजदूर पिछले दो दिनों में पलायन कर चुके हैं। मजदूरों की कमी के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। हालांकि वे नये मजदूरों को लाए हैं, लेकिन अनुभव की कमी के कारण एनएच का निर्माण उसी स्थिति में है। श्रमिकों की कमी के कारण केवल  राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण ही नहीं बल्कि अन्य बड़ी भवन निर्माण परियोजनाओं के साथ-साथ निजी निर्माण भी रुक गए हैं। गौरतलब है कि ऊपरी असम में कई निर्माण परियोजनाओं में खासकर बरपेटा, धुबड़ी, ग्वालपाड़ा और बराक घाटी के करीमगंज और हैलाकांदी जिलों के मजदूर, राजमिस्त्री और बढ़ई काम कर रहे थे। लेकिन ऊपरी असम में जातीय दल-संगठनों की धमकी मिलने के कारण मियां श्रमिक अपनी जान के डर से अपने-अपने घर लौट गए जिसके कारण ऊपरी असम में चल रही विभिन्न परियोजनाओं पर भयंकर संकट मंडरा रहा है। इसी बीच शिवसागर के भाजपा नेता मयूर बरगोहाईं द्वारा गुंडों के जरिए बरपेटा-ग्वालपाड़ा के मियां श्रमिकों को डंडे से पीट-पीट कर अधमरा कर देने की घटना के बाद मियां मजदूर घबरा गए  हैं और वे ऊपरी असम छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। भाजपा नेता मयूर बरगोहाईं के खिलाफ बरपेटा सदर थाने में शिकायत दर्ज होने के बावजूद मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले गृह विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने पर जान की खातिर ऊपरी असम के विभिन्न जगहों से मियां मजदूर भाग चुके हैं। इस दौरान ऊपरी असम में मियां विरोधी अभियान के परिणामस्वरूप नगांव के मियां मछली व्यापारियों ने ऊपरी असम में मछलियां भेजने से इनकार कर दिया है। मध्य असम के अल्पसंख्यक व्यापारियों द्वारा दक्षिण में मछली न भेजने की धमकी देने के बाद पूर्व अल्फा नेता जीतन दत्त ने ऊपरी असम में खारुपेटिया की सब्जियों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी जारी की। पूर्व अल्फा नेता की इस धमकी के बाद अन्य जातीय संगठनों पर भी अब ऊपरी असम में खारुपेटिया की सब्जियों की बिक्री में बाधा डालने के आरोप लगे हैं। मियां व्यवसायियों ने शिकायत की है कि दरंग जिले के खारुपेटिया से भेजी गई सब्जियों से भरे ट्रक तिनसुकिया से लौटा दिया गया है। खारुपेटिया के एक व्यापारी ने मीडिया के सामने शिकायत की है कि स्थानीय संगठनों की बाधाओं के कारण तिनसुकिया जिले के जागुन, मार्घेरिटा, लिडु और अन्य स्थानों पर वे सब्जियां नहीं भेज पाए हैं। ऐसी शिकायतें हैं कि खारुपेटिया की सब्जियां सिर्फ ऊपरी असम में ही नहीं, बल्कि दरंग जिले में भी बेचने की अनुमति नहीं है। स्थानीय व्यवसायी शुक्रवार को सिपाझार के देवमरनई साप्ताहिक बाजार के साथ ही पाथरीघाट बाजार में भी खारुपेटिया की सब्जियां नहीं बिकने दीं। नतीजतन खारुपेटिया के व्यवसायियों को सब्जियों से भरे ट्रक को वापस ले जाना पड़ा। यह स्पष्ट है कि ऊपरी असम में जातीय संगठनों द्वारा शुरू किए गए मियां विरोधी अभियान का दुष्प्रभाव पूरे असम में फैलने लगा है।