पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने शुक्रवार को विधानसभा में एक रिपोर्ट पेश की। सीएजी के रिपोर्ट में राज्य में हो रही अनेक वित्तीय अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार की घटनाओं का खुलासा हुआ। सीएजी द्वारा शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में फर्जी लाभार्थियों के लिए खरीदे गए करोड़ों रुपए का सामान सरकारी दफ्तरों में पड़े रहने, शिक्षा विभाग में छात्रवृत्ति घोटाला, हॉस्टल फीस घोटाला, पीएम किसान घोटाला, जियोमेट घोटाला, जीएमडीए की अक्षमता और जल बोर्ड द्वारा करोड़ों रुपए का अनाधिकृत व्यय, जिला आयुक्त का तिरपाल घोटाला और कई अन्य मामले उजागर हो गए। सीएजी के रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि राज्य में दीनदयाल विकलांग पेंशन योजना में कई अनियमितताएं हैं। 2018-19 से 2019-20 तक इस योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों को पेंशन मिली। राज्य के विभिन्न जिलों में 1901 फर्जी लाभार्थियों को 90 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। वहीं दूसरी ओर सीएजी ने यह भी खुलासा किया कि एसटी को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति देने में शिक्षा विभाग में व्यापक अनियमितताएं थीं। 451 एसटी छात्रों को एक से अधिक बार छात्रवृत्ति मिली। इससे सरकारी खजाने पर 10.21 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च आया। राज्य सरकार द्वारा की गई जांच में (मई-जुलाई 2020), 37 प्रतिशत लाभार्थी अयोग्य पाए गए। अक्तूबर 2021 तक अयोग्य लाभार्थियों को जारी की गई धनराशि में से केवल 0.24 प्रतिशत की वसूली की गई। उत्तरी लखीमपुर के रंगानदी में बाढ़ प्रबंधन के नाम पर 9.53 करोड़ रुपए के जियोमेट की अनावश्यक खरीदारी हुई थी। इससे ठेकेदार को फायदा हुआ। इसके अलावा जिओ बैग बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदे गए थे। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि गुवाहाटी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी (जीएमडीए) के पास प्रमुख परियोजनाओं को संभालने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन नहीं हैं। जीएमडीए में सभी वरिष्ठ पद संविदा या प्रतिनियुक्ति के आधार पर हैं। लेकिन इसके बावजूद जीएमडीए को सरकार द्वारा जल आपूर्ति, निर्माण परमिट, शहरी सुविधाएं, खेल के मैदान, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग आदि योजनाओं में शामिल किया गया है। जीएमडीए के सीईओ और एमडी के बीच समन्वय की कमी के कारण जल बोर्ड के एमडी ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर अनाधिकृत रूप से 4.33 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। चराईदेव जिले के डीसी ने एमआरपी से अधिक दर पर तिरपाल शीट खरीदी, जिससे सरकारी खजाने से 73 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च हुआ। इसके अलावा फर्जी इनवॉइस पर 14.88 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इस दौरान अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रावास शुल्क के भुगतान में भी अनियमितताएं पाई गई। बिना छात्रावास सुविधा वाले 86 स्कूलों ने फर्जी तरीके से 7.92 करोड़ रुपए का गबन किया। स्कूलों में नामांकित नहीं होने वाले 3,138 छात्रों को छात्रवृत्ति के नाम पर 2.98 करोड़ रुपए दिए गए। सीएजी की रिपोर्ट में मैदानी जनजातियां और पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय तथा अनुसूचित जाति कल्याण निदेशालय में भी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। पीएम किसान योजना के क्रियान्वयन में भी अनियमितताएं पाई गई  हैं। बिना जमीन के कागजात के ही कुछ लोगों को योजना का लाभ प्राप्त हुआ। 16 जिलों में बैंक खाता नंबरों की शुरुआत में शून्य जोड़कर बनाए गए 3577 फर्जी पंजीकरण नंबरों में 3000.98 लाख रुपए जारी किए गए थे। सीएजी की 172 पेज की सोशल सेक्टर रिपोर्ट में उपर्युक्त तथ्यों के अलावा राज्य की वित्तीय अनियमितताओं के अन्य कई तथ्य उजागर किया गया है।