पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : राज्य के शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में बाढ़ को रोकने के लिए सरकार एक नया कानून लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक ने इस संबंध में फैसला लिया है। बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और परिवहन मंत्री केशव महंत ने संवाददाताओं से कहा, असम शहरी क्षेत्र जलाशय संवर्धन और संरक्षण विधेयक 2024 आगामी असम विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। पहले, गुवाहाटी में पांच जलाशयों - बरचला, शिलसांको, सरुचला, बोंदाजान और दीपर बील के संरक्षण और संवर्धन के लिए कानून थे। गुवाहाटी वाटरशेड संवर्धन और संरक्षण अधिनियम पारित किया गया नया कानून गुवाहाटी के साथ-साथ पूरे असम में सभी शहरी जलाशयों को कवर करेगा। इसमें बील, नदियां, सीवर आदि सभी प्रकार के जलाशय शामिल होंगे। इसके अलावा 6 बीघे से ऊपर के निजी तालाबों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। ऐसे तालाब का मालिक चाहकर भी तालाब नहीं पाट सकेगा। कानून के अनुसार जलाशयों के संरक्षण के लिए दो समितियों का गठन किया जाएगा, एक समिति राज्य स्तर पर और दूसरी जिला स्तर पर गठित की जाएगी। इस संबंध में जनता की आपत्तियां लेने के लिए सुनवाई की जाएगी। मत्स्य विभाग एवं वन विभाग के अधीन जलाशयों का संरक्षण किया जाएगा। कोई भी शहरी संस्था किसी जलाशय को गोद ले सकती है। कमेटी तीन माह के भीतर सभी सर्वे पूरा कर लेगी। इसके बाद राज्य समिति इसकी निगरानी करेगी और इसे आरक्षित क्षेत्र माना जाएगा। जलाशयों के अतिक्रमण करने पर तीन साल की जेल और 1 लाख रुपए का जुर्माने की सजा हो सकती है। जलाशयों के संरक्षण की जिम्मेदारी कोई भी संस्था ले सकती है। शहर का मास्टर प्लान क्षेत्र इसके अंतर्गत होगा। ग्रामीण इलाकों के लिए भी ऐसे कानून लाए जाएंगे। बड़ी कंपनियां चाहें तो इस जलाशयों को लीज में ले सकती हैं और इसका संरक्षण एवं संवर्द्धन कर सकती हैं। यदि कोई इन जलाशयों में मछली पालना या नाव चलाना चाहते हैं, तो ऐसा कर सकते हैं। इस बीच राजस्व मंत्री योगेन मोहन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ई-ट्रेजरी भुगतान में लोगों को परेशानी हो रही है। इसलिए लोग अगले वर्ष के लिए ट्रेजरी का भुगतान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकेंगे। कैबिनेट ने इस संबंध में निर्णय लिया है। कमीशन का भुगतान सीधे मौजादार के खाते में किया जाएगा। इस बीच, मंत्री केशव महंत ने कहा कि कैबिनेट के फैसले के अनुसार पेंशन सेवा केंद्रों को अब शिक्षा विभाग के अधीन लाया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि अधिकांश पेंशनभोगी शिक्षक हैं। मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक से पहले कलाक्षेत्र में एक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में घोषणा की कि अब से, एक सरकारी कर्मचारी के शेष वेतन का 80 प्रतिशत उसकी पत्नी को और 20 प्रतिशत उसके माता-पिता को दिया जाएगा। हालांकि, माता-पिता को इसके लिए कोई अन्य सरकारी पेंशन आदि नहीं मिल सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले मृत कर्मचारी का पूरा शेष वेतन पत्नी को मिलता था।