पूर्वांचल प्रहरी कार्यालय संवाददाता गुवाहाटीः असम के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों से जापानी एनकेफ्लाटिस से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग असप्तालों में इलाजरत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मोरीगांव में इस बीमारी से एक किशोरी सहित तीन लोगों के मरने की खबर है। सूत्रों के अनुसार मोरीगांव और धुबड़ी जिले में जापानी एनकेलाइटिस के मामले सबसे अधिक आए हैं। यह बीमारी इन दोनों जिलों में एक भयावह रूप ले लिया है, जिससे स्थानीय निवासियों में व्यापक चिंता पैदा हो गई है। सूत्रों के अनुसार मोरीगांव में 15 लोगों के जेई से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जिनमें एक किशोरी की इस बीमारी से मौत हो गई है। मोरीगांव गीतानगर के भवकांत नाथ और राजमणि मेधी की भी जेई से मौत होने का संदेह है। सभी प्रभावित व्यक्तियों का वर्तमान में इलाज चल रहा है, जिनमें से अधिकांश गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) में भर्ती हैं और एक बच्चा मोरीगांव सिविल अस्पताल में भर्ती है। इस प्रकोप ने मुख्य रूप से बच्चों और बुजुर्गों को प्रभावित किया है। सूत्रों ने बताया कि 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सात मामले और बड़े वयस्कों में आठ मामले हैं। मोरीगांव के एक चिकित्सक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कल तक जापानी एनकेफलाइटिस के 15 मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि एक की मौत की सूचना मिली थी। एक अतिरिक्त संदिग्ध मामले की पहचान की गई और हम आज परीक्षण परिणाम की उम्मीद करते हैं। सभी प्रभावित व्यक्ति वर्तमान में जीएमसीएच में अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि एक बच्चा मोरीगांव सिविल अस्पताल में भर्ती है। मामलों में सात 15 साल से कम उम्र के बच्चे हैं और आठ बुजुर्ग हैं। इसका प्रकोप मुख्य रूप से बच्चों और बड़े वयस्कों को प्रभावित करता है। सूत्रों के अनुसार धुबड़ी में पांच व्यक्तियों में जेई का निदान किया गया है, जिससे स्थानीय आबादी में इस बीमारी को लेकर आतंक फैल गया है। संक्रमित मामलों की पहचान रानीगंज छापर और गोलकगंज ब्लॉक के तीन पुरुषों और दो महिलाओं में की गई है। धुबड़ी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरूप कुमार चौधरी ने कहा कि मानसून के मौसम के दौरान मच्छर जनित बीमारियों में वृद्धि हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य विभाग मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने और बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानी बरत रहा है। उन्होंनेकहा कि जापानी एनकेफलाइटिस, डेंगू,मलेरिया और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का प्रचलन मानसून के मौसम में बढ़ जाता है।
मोरीगांव व धुबड़ी जिले में जापानी एनकेफ्लाइटिस का कहर, तीन मरे