सावन माह को लेकर भक्तों में एक अलग ही उमंग देखने को मिलती है। इस माह को शिव जी की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। सावन में आने वाले सोमवार के महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन लोग शिवालय जातक शिव जी की विशेष विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं शिव पूजन से जुड़े कुछ जरूरी नियम।

जलाभिषेक के समय न करें ये गलती : पूजा के दौरान अभिषेक के लिए हमेशा गंगाजल, साफ पानी या फिर गाय के दूध का ही इस्तेमाल करें। साथ ही शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जलधारा पतली और धीमी गति से शिवलिंग पर गिरे। कभी भी तीव्र गति से जलाभिषेक न करें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि जलाभिषेक के समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इस दौरान बैठकर या झुककर ही शिवलिंग का जलाभिषेक करें न कि सीधे खड़े होकर।

इस तरह चढ़ाएं बेलपत्र : भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि बेलपत्र 3 पत्तों वाला और साबुत होना चाहिए। बेलपत्र को हमेशा चिकने सतह की ओर से शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि शिवलिंग पर भूल से भी तुलसी, सिंदूर, हल्दी, नारियल, शंख और केतकी के फूल आदि नहीं चढ़ाने चाहिए।

परिक्रमा के दौरान ध्यान रखें ये बात : शिवलिंग की पूजा के दौरान कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर से परिक्रमा शुरू करनी चाहिए और अर्धचंद्राकार में चक्कर लगाने के बाद वापस अपने स्थान पर आ जाएं। शिवलिंग के जलहरी (अभिषेक के दौरान जहां से जल नीचे की तरफ गिरती है) को कभी भी लांघना नहीं चाहिए।