पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : बुधवार आधी रात को एक फेसबुक लाइव में सीएम डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने एपीएससी मॉडल पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करने का निर्णय अस्थायी रूप से बदल दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अंतिम निर्णय पर पहुंचने के लिए कुछ दिनों का समय  मांगा है।  गौरतलब है कि असम सीधी भर्ती के तहत राज्य सरकार 15, 22 और 29 सितंबर को तीसरी श्रेणी की और 20 तथा 27 अक्तूबर को चौथी श्रेणी की भर्ती परीक्षाएं आयोजित करेगी। सीएम डॉ. शर्मा ने घोषणा की थी कि तीसरी और चौथी श्रेणी की परीक्षाएं एपीएससी के मॉडल पर आयोजित की जाएंगी। परीक्षा के लिए करीब दो महीने शेष रहते राज्य सरकार ने अचानक परीक्षाओं का सिलेबस और पैटर्न बदल दिया जिसके कारण परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी असमंजस में पड़ गए और पूरे राज्य में इसकी प्रतिक्रिया हुई।

विभिन्न लोगों ने तीखी भाषा में सरकार की आलोचना की। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने बुधवार रात फेसबुक लाइव में कहा कि सरकार जनता के अधीन है, जनता से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि एपीएससी की तर्ज पर एडीआरई परीक्षा आयोजित करने की तैयारी पर जिन्होंने हमारे साथ दुव्र्यवहार किया है, मैं उन्हें अपना प्यार देता हूं। जिन लोगों ने अच्छी भाषा में हमारी आलोचना की है, मैं उन लोगों का सम्मान करता हूं। कुछ लोगों ने हमें सुझाव दिया है कि परीक्षा नए नियमों के तहत नहीं कराई जानी चाहिए, इन्हें पुराने नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। इसलिए हम इस संबंध में जनता से सलाह लेंगे। हम जनता के सुझावों के आधार पर दो या तीन दिनों के भीतर अंतिम निर्णय की घोषणा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्य भर में व्यापक प्रतिक्रियाओं के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को कॉलेज की नौकरियों से स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी)वापस लेने का निर्देश रद्द कर दिया था। राज्य सरकार को बाहरी राज्य के नौकरी चाहने वालों को लाल कालीन देकर स्थानीय लोगों को वंचित करने की अपनी साजिश से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने आश्चर्यजनक रूप से 4 जुलाई में उच्च शिक्षा उप निदेशक सुमित्रा देब द्वारा जारी पीआरसी वापसी नोटिस पर अनभिज्ञता व्यक्त की है। एक्स-हैंडल में मुख्यमंत्री ने पूछा कि उच्च शिक्षा निदेशालय ने सरकार की अनुमति के बिना ऐसे निर्देश कैसे जारी किए। इसके अलावा मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने इस घटना की जांच के भी निर्देश दिए। लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा जांच की घोषणा के 24 घंटे बाद भी किसी का बाल बांका नहीं हुआ।