जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से आतंकवादी गतिविधियों में तेजी आई है। कुछ दिन पहले जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आंतकियों ने सेना के वाहन पर घात लगाकर हमला किया जिसमें पांच जवान शहीद हो गए है। इससे पहले भी हिंसा की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा बल काफी चौकस हो गए हैं। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों की बैठक हुई जिसमें आतंकवाद पर चौतरफा कार्रवाई करने पर सहमति बनी है। इस बार कश्मीर घाटी के साथ-साथ जम्मू पर भी फोकस करने का निर्णय लिया गया है क्योंकि आतंकियों का निशाना जम्मू क्षेत्र रहा है। हाल के आतंकी हमले पर गौर करने से पता चलता है कि पाकिस्तान से आए आतंकियों को स्थानीय आतंकियों एवं स्लीपर सेल द्वारा पूरी जानकारी दी जाती है ताकि उनका काम आसान हो जाता है। सुरक्षा बलों ने स्थानीय आतंकियों एवं स्लीपर सेल के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने के लिए हर तरह की साजिश में लगा हुआ है। आतंकियों पर अंकुश लगाने के लिए सीमा पर सुरक्षा कड़ी करने के साथ-साथ कूटनीति प्रयास करना भी जरूरी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में संपन्न शंघाई सहयोग संगठन(एससीओ) की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को आईना दिखाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित है। सभी देशों को मिलकर आतंकियों की खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इसके जवाब में जयशंकर ने पाकिस्तान को ही कठघरे में खड़ा किया। मालूम हो कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद की जननी रहा है, उससे आतकंवाद पर आईना दिखाना का कोई अधिकार नहीं है। जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन तथा चीन की राष्ट्रपति जिंनपिंग के सामने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई। अपने रूस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पुतिन के सामने आतंकवाद मुद्दा उठाया। मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में रूस में भी आतंकी घटनाएं हुई है। दोनों ही देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प लिया। आतंकवाद की समस्या केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका काफी विस्तार हो चुका है। अब तो पश्चिमी देशों में भी आंतकी घटनाएं हो रही हैं। मध्य पूर्व तथा अरब की देशों में कई आतंकी संगठन वहां की सरकार के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इजरायल-हमास युद्ध दौरान भी कई आतंकी संगठन खुलकर सामने आ गए हैं। हूती विद्रोहियों ने फारस की खाड़ी तथा हिंद महासागर में आवागमन करने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के लिए इन क्षेत्रों में अपने कई युद्धपोतों को तैनात किया हुआ है। भारत हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आवाज उठाता रहा है। दुनिया के कई देश अपने हितों के अनुसार आतंकवाद की परिभाषा बनाते रहते हैं। खासकर पश्चिमी देश भारत में हो रहे आतंकी घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेते है। अब जब आतंकवाद पश्चिमी देशों तक पहुंच गया है तब जाकर उनको आतंकवाद की पीड़ा महसूस हो रही है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकियों की घुसपैठ करा कर अपना मकसद पूरा करना चाहता है। लश्कर-ए-तयैबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे बड़े आतंकी संगठन पाकिस्तान में रहकर भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। बांग्लादेश में भी कई कट्टरपंथी संगठन भारत को अस्थिर करने के लिए लगातार षड्यंत्र कर रहे हैं। पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई ऐसे आतंकी संगठनों को हर तरह की सहायता दे रहा है। चीन भी पाकिस्तान के माध्यम से भारत में गड़बड़ी फैलाने के लिए काम कर रहा है। अगर आतंकवाद पर काबू पाना है तो दुनिया के देशों को मिलकर साझा रणनीति बनानी होगी। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए कठोर कदम उठाना होगा। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत को सर्जिकल स्ट्राइक भी करना होगा।