पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : बारिश में मामूली कमी के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जल स्तर कम हो गया है, लेकिन बाढ़ की तबाही कम नहीं हुई है। हाल की बाढ़ से राज्य के विभिन्न हिस्सों में जटिलताएं अभी तक बरकरार हैं। कई जिलों में बाढ़ की स्थिति यथावत बनी हुई है। खासकर शिवसागर, कामरूप, डिब्रूगढ़, नलबाड़ी और बरपेटा जिलों में अभी भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बाढ़ पीड़ितों और मवेशियों के लिए भोजन का गंभीर संकट है। बाढ़ से विस्थापित कई परिवार आज भी बांध पर शरण लिये हुए हैं। बाढ़ से राज्य के अधिकांश जिलों की सड़कें नष्ट हो गई हैं। बाढ़ से कई जगहों पर पुल बह जाने के कारण बाढ़ कम होने के बाद भी कई परिवार घर नहीं जा पाए हैं। हाजो, कामरूप जिला तथा कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के क्षेत्र में बाढ़ से की सड़कें तबाह हो गई हैं जिसके कारण आम जनता के लिए यातायात लगभग ठप हो गया है। नतीजतन मरीजों को डॉक्टर के पास ले जाने में भी अप्रत्याशित समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। आसू ने क्षेत्री की क्षतिग्रस्त सड़कों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग पर विरोध प्रदर्शन किया है। हाल की बाढ़ से उदलगुड़ी में एक नया पुल नष्ट हो गया है। इस बीच, बाढ़ पीड़ितों ने कई जगहों पर अपने पशुओं के लिए पशु आहार के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायत की है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों, राजस्व क्षेत्रों और गांवों की संख्या में सोमवार को कमी आई है। प्राधिकरण के मुताबिक बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या  25 तक घट गई है। बाढ़ से खेत नष्ट हो जाने के कारण लाखों किसान सिर धुन रहे हैं। कई किसान बीज नष्ट होने से भी परेशान हैं। राज्य में इस वर्ष बाढ़, भूस्खलन और तूफान में 78 लोगों की मौत हुई जबकि इनमें से केवल बाढ़ के कारण 66 लोगों की मौत हुई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का सोमवार को सिलचर पहुंचने और मणिपुर जाते समय कछार जिले के फुलेर्तल में बाढ़ राहत शिविर का दौरा किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में सभी राहत शिविरों में पूरी व्यवस्था की गई है और स्थिति सामान्य होने तक आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार रखा गया है।  उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत शिविरों की सुरक्षा और स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता है और उनकी टीम वहां रह रहे लोगों के संपर्क में है। वर्तमान में, 28 जिलों में 3,446 गांवों के लगभग 23 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि बाढ़ की दूसरी लहर से 68,432.75 हेक्टेयर फसल भूमि जलमग्न हो गई है। धुबड़ी में सबसे अधिक 7,54,791 लोग प्रभावित हुए, इसके बाद कछार में 1,77,928 लोग और बारपेटा में 1,34,328 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। कुल 53,689 लोगों ने 269 राहत शिविरों में शरण ली है, जबकि राहत शिविरों में नहीं रह रहे 3,15,520 लोगों को राहत सामग्री प्रदान की गई है। ब्रह्मपुत्र निमती घाट, तेजपुर और धुबरी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। खोवांग में बुरही दिहिंग, शिवसागर में दिखौ, नंगलमुराघाट में दिसांग, नुमालीगढ़ में धनसिरी, धरमतुल में कोपिली, बारपेटा में बेकी, गोलकगंज में संकोश, बीपी घाट में बराक और करीमगंज में कुशियारा नदियां खतरे से निशान से ऊपर हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन सहित कई एजेंसियां राहत और बचाव कार्य कर रही हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न हिस्सों में 171 नौकाओं को तैनात किया गया है। विभिन्न एजेंसियों ने पिछले 24 घंटे में कुल 70 लोगों और 459 मवेशियों को बचाया। राज्य भर से बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और मत्स्य पालन तालाबों को नुकसान पहुंचने की खबरें मिली हैं।