गुप्त नवरात्रि करने से व्यक्ति को अक्षय फल मिलते हैं, जो जीवन की सभी मुश्किलों से निपटने में मदद करते हैं। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की प्रतिपदा तिथि से इस पावन पर्व की शुरूआत होती है। माता दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही इस दौरान दस महा विद्याओं की आराधना का भी बड़ा महत्व है। एक साल में चार बार नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इनमें माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। हर नवरात्रि के पर्व में घट स्थापना का विशेष महत्व है। घट स्थापना के बाद ही माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा प्रारंभ की जाती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 6 जुलाई को आषाढ़ प्रतिपदा के दिन होगी। इस दिन घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, इसी समय आपको माता दुर्गा और उनके प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा आराधना करनी चाहिए। पंडितों के अनुसार, नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होगी। अगर आप गुप्त नवरात्रि में घट स्थापित करने वाले हैं तो आपको इसकी तैयारी एक दिन पहले ही कर देनी चाहिए। एक दिन पूर्व ही उस स्थान की साफ सफाई कर लें जहां घट स्थापित किया जाता है। हो सके तो घट स्थापना के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व के मध्य) का चुनाव करें।  गुप्त नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही दस महाविद्याओं की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान महाविद्याओं की पूजा करने से कई सिद्धियां भक्तों को प्राप्त हो सकती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान मांस-मदिरा का सेवन करने से आपको बचना चाहिए। इस समय लहसुन-प्याज खाना भी वर्जित माना जाता है। यानि गर्म तासीर वाले भोज्य पदार्थ इस दौरान नहीं करने चाहिए। नाखून और बाल कटवाने से भी आपको बचना चाहिए। शारीरिक संबंध बनाने से भी इस दौरान बचें। घर में घटस्थापित किया है तो घर में हर समय कोई-न-कोई व्यक्ति जरूर हो। इस दौरान व्रत रखने वाले जमीन पर सोएं तो अच्छा माना जाता है। पंडितों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मांस और मदिरा का बिलकुल सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान प्याज और लहसून से भी दूरी बनाकर रखें, तामसिक भोजन जीवन में परेशानियां खड़ी करता है। गुप्त नवरात्रि में जब माता की आराधना कर रहे हैं तो किसी का भी दिल नहीं दुखाना चाहिए। किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए, गुप्त नवरात्रि में इस बात का बहुत ध्यान रखें कि दिन में ना सोएं, क्योंकि ऐसा करने से देवी मां नाराज होती हैं।