पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता गुवाहाटी : विधानसभा अध्यक्ष का प्रतिष्ठित पद छोड़ कर विश्वजीत दैमारी ने इस बार मंत्री बनने के लिए की इच्छा जताई है। इस कारण से अध्यक्ष दैमारी राजनीतिक रूप से सक्रिय बने हुए हैं। गौरतलब है कि बीपीएफ से राज्यसभा में एक सांसद के रूप में लंबे समय तक दिल्ली में रहने वाले दैमारी हग्रामा मोहिलारी का पुराना साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में प्रवेश किया था। दैमारी 2021 के विधानसभा चुनाव में पानेरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। बाद में वे असम विधानसभा के अध्यक्ष बने। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष जैसे प्रतिष्ठित पद पर रहने के बावजूद दैमारी इस बार मंत्री बनने को उत्सुक हैं। गौरतलब है कि सीएम पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि 15 अगस्त के आसपास कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार किया जाएगा।

सीएम की घोषणा ने अध्यक्ष दैमारी को राजनीतिक रूप से और सक्रिय कर दिया है। वाजपेयी भवन के सूत्रों के अनुसार विश्वजीत दैमारी ने पहले ही मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा को अपनी इच्छा से अवगत करा चुके हैं। गौरतलब है कि निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के दौरान दैमारी द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले पानेरी निर्वाचन क्षेत्र को समाप्त कर दिया गया और सीमाओं के साथ इसे टंगला निर्वाचन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया।  वाजपेयी भवन के सूत्रों के अनुसार यदि विश्वजीत दैमारी को अध्यक्ष के पद से हटा कर मंत्री बना दिया जाता है, तो रिक्त स्थआन को भरने के लिए हिमंत विश्व शर्मा कैबिनेट में सबसे अनुभवी और वरिष्ठ मंत्रियों में से एक, चंद्रमोहन पटवारी को अध्यक्ष नियुक्त करने का समीकरण है।

इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्निर्धारण में पटवारी द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया धर्मपुर निर्वाचन क्षेत्र  लुप्त हो गया। नलबाड़ी जिले में पटवारी के साथ जयंत मल्ल बरुवा भी मंत्री हैं। पार्टी में इस बात को लेकर भी काफी विवाद है कि एक ही जिले के दो सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्रों से दो विधायक मंत्री पद पर हैं। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में पहले ही उल्लेखनीय कौशल दिखा चुके चंद्रमोहन पटवारी को भाजपा और सरकार विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त कर सम्मानित करना चाहती है। यह समय ही बताएगा कि असम के लोगों को मंत्री के रूप में विश्वजीत दैमारी और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में वन और पर्यावरण मंत्री चंद्रमोहन पटवारी मिलते हैं या नहीं। हालांकि, ये सब मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।