हर वर्ष की भांति कामरूप कामाख्या (असम) में स्थित देवी मां कामाख्या मंदिर में होने वाले अंबुवासी महापर्व का शुभारंभ 22 जून से लेकर 26 जून तक होगा। इस बार अंबुवाची पर्व का शुभारंभ त्रिग्रही योग में होना एक अद्भुत संयोग है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है तब वर्षा ऋ तु का प्रारंभ होता है। आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य देव का प्रवेश हवा में आर्द्रता ( नमी) को बढ़ा देता है और इस संयोग को अंबुवासी योग कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय देवी मां भगवती कामाख्या के रजस्वला का समय होता है और इसी कारण से देवी के गर्भ गृह के कपाट को बंद कर दिया जाता है और रजो निवृत्ति के बाद ही मुख्य द्वार को खोला जाता है। अंबुवासी मेले में तीन दिन तक तंत्र साधना का विशेष दौर चलता है, क्योंकि तंत्र साधना वाम मार्गी षटकर्म कार्य इत्यादि के लिए यह विशेष अद्भुत समय होता है।

क्यों विशेष है त्रिग्रही योग : जब भी गोचर में तीन ग्रह एक साथ युति करें तो इसे त्रिग्रही योग की संज्ञा दी जाती है। इस बार सूर्य, बुध और शुक्र का राहु के नक्षत्र आर्द्रा में होने के कारण तंत्र साधक एवं भक्तों के लिए पूजा-अर्चना व उपवास के लिए विशेष संयोग बनेगा। रूद्रयामल तंत्र में कहा गया है जो जातक जातिका अंबुवासी संयोग में देवी कामाख्या का उपवास व पूजा-अर्चना करता है उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तीन दिन रजो निवृत्ति के बाद देवी के मंदिर को खोले जाने के बाद भक्तों और साधकों को दर्शन करने की अनुमति मिलती है और माई के लाल वस्त्र का प्रसाद सभी को दिया जाता है। जब तक मंदिर 3 दिन के लिए बंद रहता है उस दौरान परिक्रमा विधान चलता रहता है। पूर्वोत्तर के असम राज्य के गुवाहाटी शहर स्थित नीलांचल पर्वत पर देवी मां कामाख्या का यह मंदिर योनि पीठ और तंत्र पीठ के नाम से जाना जाता है। यह तंत्र मार्ग का विश्वविद्यालय है, यहां साधन पूजन किए बिना ष्टकर्म वाम मार्गी साधनाओं में सफलता नहीं मिलती।